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नीतीश कुमार नहीं बनेंगे अगले मुख्यमंत्री; बिहार चुनाव से पहले ही प्रशांत किशोर ने कर दी भविष्यवाणी

Prashant Kishore Slams Nitish Kumar: प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा दावा किया है। उन्होंने ये भविष्यवाणी की है कि नीतीश कुमार किसी स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के बजट को निराशाजनक बताते हुए छलावा करार दिया। आपको बताते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा।

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प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को लेकर किया बड़ा दावा।

Bihar Chunav: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर जन सुराज उद्घोष यात्रा के तहत बुधवार को पश्चिम चंपारण पहुंचे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार किसी भी स्थिति में बिहार के अगले मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे, उनके दल को इतनी कम सीटें आएंगी कि उनके किसी तरफ पलटने का फायदा नहीं होगा।

नीतीश कुमार को लेकर पीके ने किया बड़ा दावा

प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी बिहार आने पर भले नीतीश कुमार को बिहार का लाडला मुख्यमंत्री बता रहे थे, लेकिन मेरी अपील है कि वे अगली बार बिहार आएं तो उन्हें यह घोषणा करनी चाहिए कि यही लाडले व्यक्ति अगले पांच वर्ष भी मुख्यमंत्री रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस घोषणा के बाद भाजपा को चंपारण में एक-एक सीट पर हार का सामना करना पड़ेगा। भाजपाई नीतीश कुमार को खाली मुखौटा बनाकर वोट लेना चाहते हैं, चुनाव जीतने के बाद इस बार नीतीश कुमार को हटाकर अपना मुख्यमंत्री बनाएंगे।

'चुनाव जीतने के बाद पलटी मारते हैं नीतीश कुमार'

प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार में इतना दम नहीं है कि पलटी मार लें, वह चुनाव जीतने के बाद पलटी मारते हैं। नीतीश कुमार ने 2015 के अलावा अपने पूरे जीवन में भाजपा के बगैर चुनाव नहीं लड़ा है, वह लड़ते ही हैं भाजपा की ताकत और संगठन के भरोसे। उनके पास इतनी हिम्मत नहीं है कि वह अकेले चुनाव लड़ लें। उनका इतिहास चुनाव लड़ने के बाद पलटी मारने का है। लेकिन, इस बार जनता भी मन बनाकर बैठी है कि उनके दल को इतनी कम सीटें आएंगी कि उनके किसी तरफ पलटने का कोई फायदा नहीं होगा। वह मुख्यमंत्री नहीं बनने वाले हैं।

प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के बजट को निराशाजनक बताते हुए छलावा करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बजट पिछले 18-19 वर्षों से एक जैसा है, जिसमें न तो प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की योजना है और न ही पलायन रोकने की। शिक्षा सुधार, रोजगार और उद्योग स्थापना पर भी कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। बिना ठोस नीति के बिहार की स्थिति में कैसे सुधार आएगा?

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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