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Meerut Chunav: क्या कहता है मेरठ लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास? अरुण गोविल की किस्मत पर 4 जून को फैसला

Election News: मेरठ के पहले सांसद शाह नवाज खान ने तीन बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के महाराज सिंह भारती सांसद चुने गए। 1971 में फिर कांग्रेस की वापसी हुई और शाह नवाज खान फिर सांसद बने। इस बार इसीट से भाजपा के अरुण गोविल बनाम सपा की सुनीता वर्मा का मुकाबला है।

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अरुण गोविल का क्या होगा?

Photo : Times Now Digital

Meerut Election Result: वैसे तो मेरठ लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी सकारात्मक है, लेकिन अरुण गोविल का क्या होगा, इसका खुलासा तो 4 जून को ही होगा। मेरठ में भाजपा ने अब तक 6 बार लोकसभा चुनाव जीता है। जिसमें तीन बार अमर पाल सिंह सांसद रहे और तीन बार राजेंद्र अग्रवाल ने जीत हासिल की। इस बार राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर भाजपा ने अरुण गोविल को मैदान में उतारा है।

मेरठ में किसका बजेगा डंका, किसकी लगेगी लंका?

टीवी सीरियल में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने सपा विधायक की पत्नी सुनीता वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने देवव्रत कुमार त्यागी को टिकट दिया है। भाजपा ने इस सीट से लगातार तीन बार के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काट दिया, कहीं न कहीं मौजूदा सांसद के समर्थकों में भाजपा के इस फैसले को लेकर नाराजगी देखने को मिली। देखना होगा कि चुनावी नतीजों में मेरठ में किसका बजेगा डंका, किसकी लंका लगती है।

कब कौन चुना गया मेरठ लोकसभा सीट से सांसद?

वर्षनामपार्टी
1952शाह नवाज खानभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1957शाह नवाज खानभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962शाह नवाज खानभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967महाराज सिंह भारतीसंयुक्त सोशलिस्ट पार्टी
1971शाह नवाज खानभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977कैलाश प्रकाशजनता पार्टी
1980मोहसिना किदवईभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1984मोहसिना किदवईभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989हरीश पालजनता दल
1991हिंसा के कारण चुनाव रद्द ---
1994 (उपचुनाव)अमर पाल सिंहभारतीय जनता पार्टी
1996अमर पाल सिंहभारतीय जनता पार्टी
1998अमर पाल सिंहभारतीय जनता पार्टी
1999अवतार सिंह भड़ानाभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2004मोहम्मद शाहिद अख़लाक़बहुजन समाज पार्टी
2009राजेंद्र अग्रवालभारतीय जनता पार्टी
2014राजेंद्र अग्रवालभारतीय जनता पार्टी
2019राजेंद्र अग्रवालभारतीय जनता पार्टी
लोकसभा चुनाव 2009 से ही मेरठ से भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल सांसद चुने जा रहे हैं। लेकिन 2004 में इस सीट से बसपा के मोहम्मद शाहिद अखलाक ने चुनाव जीता था। उससे पहले 1999 में कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना मेरठ के सांसद थे। मेरठ के पहले सांसद शाह नवाज खान ने तीन बार कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के महाराज सिंह भारती सांसद चुने गए। 1971 में फिर कांग्रेस की वापसी हुई और शाह नवाज खान फिर सांसद बने। 1977 में जनता पार्टी के टिकट से कैलाश प्रकाश मेरठ के सांसद चुने गए। कांग्रेस ने 1980 में इस सीट पर वापस जीत हासिल की और दो बार मोहसिना किदवई यहां से सांसद बने। 1989 में मेरठ से जनता दल के हरीश पाल ने चुनाव जीता। फिर भाजपा के अमर पाल सिंह 1999 तक मेरठ के सांसद रहे।
Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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