Maharashtra Local Body Election 2025: महाराष्ट्र में बहुप्रतीक्षित स्थानीय निकाय चुनावों का पहला चरण मंगलवार को संपन्न होगा। 264 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में हो रहे इस मतदान में करीब एक करोड़ मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करेंगे। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में गठबंधन राजनीति, कानूनी चुनौतियां और आंतरिक मतभेद चरम पर हैं। राज्य में 24 स्थानीय निकायों के अलावा 76 अन्य स्थानीय निकायों की 154 वार्ड सीट के लिए भी मंगलवार को मतदान नहीं होगा। कुल 246 नगरपालिका परिषदों और 42 नगर पंचायतों के साथ-साथ 288 स्थानीय निकायों में नगरपालिका अध्यक्ष पदों के लिए चुनावों की घोषणा चार नवंबर को की गई थी।
कानूनी उलझनों के बीच चुनावी प्रक्रिया
करीब एक करोड़ मतदाता ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के इस बहु-स्तरीय चुनाव के पहले चरण में मतदान के पात्र हैं। उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया 31 जनवरी तक पूरी की जानी है। विभिन्न जिलों में होने वाले चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल किया जाएगा और मतगणना तीन दिसंबर को होगी। दो दिसंबर को होने वाले चुनाव में मुख्य रूप से मुकाबला सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन और विपक्षी गठबंधन ‘महा विकास आघाडी’ (एमवीए) के बीच होगा। ये चुनाव स्थानीय निकायों (नगर परिषद और नगर पंचायत) के 6,705 सदस्यों और 264 अध्यक्षों के भाग्य का फैसला करेंगे।
सवालों के घेरे में चुनावी प्रक्रिया
पहले दो दिसंबर को निर्धारित 24 स्थानीय निकायों के लिए चुनाव नामांकन पत्रों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारियों के निर्णयों के खिलाफ दायर न्यायिक अपीलों के मद्देनजर 20 दिसंबर तक स्थगित कर दिए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) द्वारा शनिवार को घोषित यह निर्णय कुछ स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं के मद्देनजर आया है, जिसमें नामांकन वापस लेने की समयसीमा और चुनाव चिह्नों के आवंटन में अनियमितताएं शामिल हैं। एसईसी ने कहा कि कई मामलों में जिला न्यायालय द्वारा अपील पर फैसला 22 नवंबर के बाद सुनाया गया या कुछ मामलों में उम्मीदवारों को महाराष्ट्र नगरपालिका चुनाव नियम, 1966 के नियम 17(1)(बी) के अनुसार नामांकन पत्र वापस लेने के लिए तीन दिन का समय नहीं मिला। परिणामस्वरूप, इन मामलों में निर्वाचन अधिकारियों द्वारा 26 नवंबर या उसके बाद चुनाव चिह्न आवंटित करने की कार्रवाई को अवैध माना गया। इसलिए, राज्य निर्वाचन आयोग ने ऐसे प्रभावित नगर निकायों में वर्तमान चुनाव प्रक्रिया पर रोक (स्थगित कर दिया) लगा दी है। सदस्य सीटों के लिए, यह स्थगन केवल उस विशिष्ट सीट पर लागू होता है, जिसके लिए अपील दायर की गई थी। राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि नया कार्यक्रम उन सीट और अध्यक्ष पदों पर लागू होगा, जहां अदालतों द्वारा 23 नवंबर या उसके बाद अपील का फैसला सुनाया गया था।
मुख्य मुकाबला: महायुति बनाम महा विकास आघाड़ी
नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने 288 में से 235 सीट हासिल करते हुए भारी जीत हासिल की थी और दो दिसंबर के चुनावों को राज्य में राजनीतिक रुझान के एक प्रमुख संकेतक के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि स्थानीय निकाय के परिणाम यह बताएंगे कि क्या यह गति जमीनी स्तर पर शासन में परिवर्तित होगी या विपक्षी एकजुटता नगरपालिका स्तर पर सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रभुत्व को चुनौती दे सकेगी। चुनावों में पहले ही महत्वपूर्ण राजनीतिक उठापटक देखने को मिल चुकी है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का मुकाबला उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा), शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(शरदचंद्र पवार) और कांग्रेस के महा विकास आघाडी से है।
