MP Election 2023: रिकॉर्ड चार बार से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें फिर बुधनी से टिकट दिया है। बीजेपी ने चौथी सूची में बुधनी से सीएम शिवराज सिंह चौहान के नाम का ऐलान किया था। बीजेपी ने अभी तक सीएम के नाम का ऐलान नहीं किया है लेकिन इसके सबसे बड़े दावेदार शिवराज ही हैं। प्रदेश की जनता उन्हें प्यार से मामा बुलाती है। आइए जानते हैं शिवराज का सियासी सफर।
1990 में पहली बार बने विधायक
एमए तक पढ़ाई कर चुके शिवराज 1990 में पहली बार विधायक बने थे। लेकिन 1991 को इस्तीफा देकर सांसद चुने गए। वह पांच बार सांसद चुने गए हैं। वह 29 नवंबर 2005 को पहली बार एमपी के मुख्यमंत्री बने। वह लगातार चार बार एमपी के सीएम रहे हैं। इस बार वह फिर चुनावी समर में किस्मत आजमा रहे हैं।
2005 में बने मुख्यमंत्री
नवंबर 2005 में तत्कालीन बीजेपी मध्य प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्हें पहली बार राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने बुधनी उपचुनाव लड़ा और 36,000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। पहली बार वह इसी सीट से विधानसभा चुनाव जीते थे। जब वह 46 साल की उम्र में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने तो वह पांच बार सांसद रह चुके थे। आलाकमान ने उनपर भरोसा जताते हुए प्रदेश की कमान सौंपी और वह उम्मीदों पर खरे भी उतरे।
2018 में करना पड़ा हार का सामना
2018 में बीजेपी ने सत्ता गंवाई और शिवराज सिंह चौहान लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, लेकिन चुनाव के ठीक एक साल बाद शिवराज सिंह चौहान को ये मौका मिल गया। उन्होंने मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कमल नाथ सरकार से किनारा करने के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर अपने करीबी नेताओं के साथ बीजेपी में शामिल हो गए।
