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MP Chunav: कौन हैं अरविंद सिंह भदौरिया? अटेर विधानसभा सीट से है गहरा नाता

Madhya Pradesh Arvind Singh Bhadoria Ater Seat Election 2023 Profile, Net Worth, Party Name: अरविंद सिंह भदौरिया एक बार फिर मध्य प्रदेश के भिंड की अटेर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस भाजपा नेता ने साल 2008 में सत्यदेव कटारे को हराया था और वो पहली बार विधायक बने थे।

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अटेर सीट से BJP उम्मीदवार अरविंद सिंह भदौरिया को जानिए।

Madhya Pradesh Arvind Singh Bhadoria Ater Election 2023 Profile: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हाईप्रोफाइल नेताओं में गिने जाने वाले अरविंद सिंह भदौरिया की काफी चर्चा है। उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने एक बार उन्हें भिंड जिले की अटेर विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। 2 जुलाई, 2020 को उन्होंने शिवराज सिंह चौहान की सरकार में कैबिनेट मंत्री की शपथ ली थी।

अरविंद सिंह भदौरिया का राजनीतिक सफर

भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार साल 2008 में अरविंद सिंह भदौरिया ने अटेर विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी। उस वक्त उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे को करारी शिकस्त दी थी और पहली बार विधायक बने थे। मध्य प्रदेश राज्य की अटेर विधानसभा सीट से ही उन्होंने साल 2018 में दोबारा जीत हासिल की और दूसरी बार विधायक चुने गए। उनकी भूमिका 2020 में बेहद अहम मानी गई जब ऑपरेशन लोटस के जरिए कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराकर भाजपा ने सरकार में वापसी की थी। जब दोबारा शिवराज सरकार बनी तो साल 2020 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और सहकारिता एवं लोक प्रबंधन विभाग दिया गया।

अरविंद सिंह भदौरिया के परिवार को जानिए

भाजपा नेता और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया के पिता का नाम शिवनाथ सिंह भदौरिया और माता का नाम कमला भदौरिया है। साल 2007 में उन्होंने अर्चना भदौरिया के शादी की और वैवाहिक जीवन में प्रवेश किया। उनके एक बेटे का नाम विराज भदौरिया है।

अरविंद सिंह भदौरिया की जिंदगी और करियर

अटेर सीट से विधायक और भाजपा प्रत्याशी अरविंद सिंह भदौरिया का जन्म मध्य प्रदेश राज्य के भिंड जिले के ज्ञानपुरा गांव में 2 अक्टूबर 1968 को हुआ था। वो अपने माता-पति कमला देवी और शिवनाथ सिंह भदौरिया की तीसरी संतान हैं। भदौरिया के पिजा उस वक्त पुलिस विभाग से नाता रखते थे, जबकि उनकी माता एक आदर्श धार्मिक गृहिणी थीं। अरविंद काफी छोटी सी उम्र में आरएसएस की शाखा से जुड़ गए थे और विद्यार्थी जीवन में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के रादस्त छात्र राजनीति से जुड़ गए थे। उन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय से एमए एलएलबी( MA LLB) और सैन्य विज्ञान से PhD (Military Science) की पढ़ाई की है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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