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Bihar Chunav: अतीत की परछाई या सियासी हथियार, चुनाव में धारणा की जंग का केंद्र बना 'जंगलराज'

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में मुकाबला केवल चुनावी मैदानों में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, टीवी बहसों और जनता की स्मृतियों में भी लड़ा जा रहा है। और जनता की स्मृतियों के इस रणक्षेत्र में शायद ही कोई शब्द ‘जंगलराज’ जितना ताकतवर राजनीतिक हथियार बन पाया है। यह शब्द लालू प्रसाद और बाद में उनकी पत्नी राबड़ी देवी के शासनकाल (1990 के दशक) के दौरान कथित रूप से कानून-व्यवस्था की बदहाली के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

Jungle Raj

बिहार विधानसभा चुनाव (फाइल फोटो)

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में मुकाबला केवल चुनावी मैदानों में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, टीवी बहसों और जनता की स्मृतियों में भी लड़ा जा रहा है। और जनता की स्मृतियों के इस रणक्षेत्र में शायद ही कोई शब्द‘जंगलराज’ जितना ताकतवर राजनीतिक हथियार बन पाया है। राजग की ओर से जदयू और उसकी प्रमुख सहयोगी भाजपा के नेता, विपक्षी राजद और ‘इंडिया गठबंधन’ पर निशाना साधने के लिए ‘जंगलराज’ शब्द का बार-बार इस्तेमाल कर रहे हैं।

कानून व्यवस्था की बदहाली वाला जंगलराज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत राजग के शीर्ष नेता लगातार चुनावी सभाओं में ‘जंगलराज’ का हवाला देते हुए मतदाताओं से अपील कर रहे हैं कि ‘‘उस दौर को लौटने न दें’’ और युवाओं को ‘‘जंगलराज के दौर की सच्चाई बताएं।’’ यह शब्द लालू प्रसाद और बाद में उनकी पत्नी राबड़ी देवी के शासनकाल (1990 के दशक) के दौरान कथित रूप से कानून-व्यवस्था की बदहाली के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

'जंगलराज' बना था नीतीश का सियासी हथियार

पहले चरण के मतदान के अगले ही दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने कैमूर जिले के भभुआ में चुनावी रैली के दौरान राजद नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘जंगलराज के युवराज से जब पूछा जाता है कि जनता से किए बड़े-बड़े वादे कैसे पूरे करेंगे, तो वह कहते हैं- हमारे पास योजना है। लेकिन जब पूछा जाए कि योजना क्या है, तो वह जवाब नहीं दे पाते।’’ करीब दो दशक पहले नीतीश कुमार ने ‘‘जंगलराज खत्म कर सुशासन लाने’’ के नारे के साथ सत्ता संभाली थी, लेकिन हर चुनाव में राजनीतिक वर्चस्व की इस लड़ाई में यह ‘बीते दौर की परछाई’ फिर जीवंत हो उठती है।

राजग नेता चुनावी सभाओं और टीवी बहस में इस शब्द का बार-बार उल्लेख करते हैं और मतदाताओं से पूछते हैं, ‘‘क्या आप बिहार में जंगलराज की वापसी चाहते हैं?’’ राजद की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने इस पर पलटवार करते हुए कहा , ‘‘भाजपा-जदयू ‘जंगलराज’ कहकर मतदाताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास दिखाने को कुछ ठोस नहीं है। अगर उन्होंने गरीबों और वंचितों के लिए काम किया होता, तो उन्हें इस तरह का भय दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती।’’

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पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव (फोटो साभार: लालू प्रसाद यादव फेसबुक साभार)

क्या कानून व्यवस्था में हुआ सुधार?

पटना के कुछ निवासियों, जिनमें 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोग और बुजुर्ग शामिल हैं, ने स्वीकार किया कि 1990 के दशक की तुलना में अब कानून-व्यवस्था ‘‘काफी सुधरी’’ है। पटना के 80 वर्षीय एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘आपने ‘जंगलराज’ के किस्से सुने होंगे। हम उस दौर की वापसी नहीं चाहते। हमें सुरक्षा चाहिए, भय नहीं।’’ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मतदाताओं की इसी ‘‘चिंता और अतीत की छवि’’ का फायदा उठाकर राजद के विरोधी दल अपनी सियासी रेखाएं खींचते हैं।

जमुई में एक सभा में शाह ने आरोप लगाया, ‘‘लालू-राबड़ी राज में अपराधी बेलगाम थे, अपहरण और नरसंहार आम थे। उस जंगलराज ने बिहार के उद्योग और व्यापार को खत्म कर दिया और राज्य को गरीबी में धकेल दिया।’’ चार नवंबर को दरभंगा की रैली में शाह ने लोगों से ‘‘जंगलराज के उस दौर को याद करने’’ और ‘‘कमल का फूल चुनने’’ की अपील की थी ताकि ‘‘जंगलराज को फिर से लौटने से रोका जा सके।’’ उन्होंने कहा था कि वह जंगलराज अब भेष बदलकर सत्ता में लौटना चाहता है’’-यह संकेत महागठबंधन की ओर था।

पहली बार कब इस्तेमाल हुआ जंगलराज शब्द

पटना के पुराने निवासियों का कहना है कि ‘जंगलराज’ शब्द का प्रयोग पहली बार 1997 में पटना उच्च न्यायालय ने शहर की दुर्दशा पर एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान किया था। उसके बाद यह शब्द जनमानस में गूंजने लगा और समय के साथ राजनीतिक विरोधियों को ‘‘नैतिक और धारणा के स्तर पर चोट पहुंचाने’’ का सशक्त हथियार बन गया। गया निवासी और वाम झुकाव रखने वाले 33 वर्षीय तारिक अनवर का कहना है, ‘‘भाजपा को लेबल लगाने और नैरेटिव गढ़ने में महारत है। उनके लिए लालू का पूरा शासन ‘जंगलराज’ है, जेएनयू ‘देशविरोधी’ है, और विपक्षी परिवार ‘वंशवादी’ हैं। यह सब राजनीतिक लाभ के लिए नैरेटिव सेट करने का तरीका है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हां, लालू के शासन में अपराध हुए, लेकिन उस दौर में वंचितों को जो सामाजिक सम्मान और बोलने का अधिकार मिला, उसे नकारना सामाजिक सच्चाई से मुंह मोड़ना है।’’ उन्होंने सवाल किया,‘‘क्या हाल के वर्षों में पटना के पारस अस्पताल हत्याकांड या मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड ‘जंगलराज’ की निशानी नहीं हैं?’’ बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीट पर छह नवंबर को मतदान हुआ, जबकि शेष 122 सीट के लिए 11 नवंबर को मतदान होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी।

पटना में मतदान के दिन डॉ. शकील कुमार और उनकी पत्नी डॉ. अनुपम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि ‘‘कानून-व्यवस्था में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा मीडिया की धारणा प्रबंधन का परिणाम भी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भयावह अपराधों के बावजूद आज मीडिया ‘जंगलराज’ शब्द के प्रयोग से बचता है। मीडिया एक धारणा बना सकता है या तोड़ सकता है- और आज सोशल मीडिया के दौर में सिर्फ एक हैशटैग से पूरा माहौल बदल सकता है।’’

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अनुराग गुप्ता
अनुराग गुप्ता Author

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स ... और देखें

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