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बिहार चुनाव से पहले क्या NDA में पड़ेगी दरार? मांझी ने अपनी पार्टी के लिए मांगी 20 से अधिक सीटें

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले क्या भाजपा नीत NDA में विवाद बढ़ने वाला है? सीटों के बंटवारे को लेकर अभी से बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और HAM के नेता जीतन राम मांझी ने बिहार चुनाव में अपनी पार्टी के लिए 20 से अधिक सीट मांगी है। आपको बताते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा।

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जीतन राम मांझी ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन।

Jitan Ram Manjhi Demands for Bihar Chunav: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में "20 से अधिक सीट" की मांग करेगी। पूर्व मुख्यमंत्री ने यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। वह अपनी पार्टी के एक समारोह को संबोधित करने यहां आये थे।

मांझी ने बिहार चुनाव के लिए मांगी 20 सीटें

जीतन राम मांझी ने चार विधायकों वाली अपनी पार्टी हम के बारे में कहा, 'वे हम के ढांचे को मजबूत कर रहे हैं, जिससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी मदद मिलेगी।' हम के एकमात्र सांसद मांझी ने हाल के उनके बयान के बारे में पूछे जाने पर कहा,'हमें चुनाव में 20 से अधिक सीट की आवश्यकता है। हम एक परिवार हैं। अगर हमारे हिस्से में चार रोटियां हैं और हमें सिर्फ़ एक दी जाती है, तो हम चुपचाप कोने में नहीं खड़े रहेंगे।' हाल में मांझी ने लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए अपनी पार्टी के "20 विधायकों" की आवश्यकता जताई थी।

अगर नहीं पूरी हुई डिमांड तो इस्तीफा देंगे मांझी?

मांझी ने हाल में धमकी भी दी थी कि अगर उनकी पार्टी को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर उचित स्थान नहीं मिला, तो वह केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वह अपने बयान से पलट गए। बाद में रविवार शाम को केंद्रीय मंत्री ने पटना स्थित अपने आवास पर एक भोज का आयोजन किया, जिसमें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ भाजपा नेता सम्राट चौधरी शामिल हुए।

इस अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए मांझी ने कहा, 'ऐसी मुलाकातें हमें राजग के भीतर अच्छा समन्वय बनाए रखने में मदद करती हैं, जिसे आप पत्रकार शरारती अफवाह फैलाकर बिगाड़ने की कोशिश करते हैं।' उन्होंने मोदी सरकार की इस बात के लिए भी प्रशंसा की कि ‘बिहार को उससे ज़्यादा आर्थिक मदद की गई है, जितना उसे विशेष श्रेणी का दर्जा मिलने पर मिलता।’ उन्होंने कहा, "कल का बजट बिहार के लिए उतना ही उदार था, जितना एक साल पहले पेश किया गया था।' बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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