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NOTA से भी कम मिले वोट, लोकसभा चुनाव में जब्त हुई सभी ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की जमानत; देख लें पूरी सूची

Transgender Candidates: भारत में अभी तक किसी ट्रांसजेंडर ने लोकसभा चुनाव नहीं जीता है। इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले सभी तीन ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है, तीनों उम्मीदवारों को नोटा से भी कम वोट हासिल हुए। जो देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व पाने के लिए इस समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है।

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सभी ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को मिले नोटा से भी कम वोट।

Photo : Times Now Digital

Election Result: लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम आ चुके हैं, भाजपा नीत एनडीए को बहुमत मिल गया है। हालांकि इस बार भारतीय जनता पार्टी को बहुमत के आंकड़े से 32 सीट कम हासिल हुई हैं। नतीजे सामने आए तो सारे एग्जिट पोल के अनुमान गलत साबित हो गए। इसी बीच चुनावी नतीजों से जुड़ी ये जानकारी सामने आई कि इस बार जितने ट्रांसजेंडर ने चुनाव लड़ा, उन सभी की जमानत जब्त हो गई।

अब तक किसी ट्रांसजेडर ने नहीं जीता लोकसभा चुनाव

भारत में अभी तक किसी ट्रांसजेंडर ने लोकसभा चुनाव नहीं जीता है। इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले सभी तीन ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है, जो देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व पाने के लिए इस समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है। तीनों ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था।

किस ट्रांसजेंडर ने कहां से लड़ा था इस बार का चुनाव?

उम्मीदवार का नामलोकसभा सीटराज्य
सुनैना किन्नरधनबादझारखंड
राजन सिंहदक्षिणी दिल्लीNCT दिल्ली
दुर्गा मौसीदमोहमध्य प्रदेश

सभी ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की जब्त हुई जमानत

सुनैना किन्नर ने झारखंड के धनबाद से चुनाव लड़ा, जिन्हें 3462 वोट हासिल हुए। दक्षिणी दिल्ली से उम्मीदवार राजन सिंह को 325 मत मिले। वहीं मध्य प्रदेश के दमोह से चुनाव लड़ने वाली दुर्गा मौसी को 1124 मत मिले। इनमें से कोई भी ट्रांसजेंडर उम्मीदवार जीत के करीब भी नहीं पहुंच पाया और सभी अपनी जमानत राशि बचाने में भी नाकाम रहे। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार जो उम्मीदवार कुल वैध मतों का कम से कम छठा हिस्सा प्राप्त करने में असफल रहते हैं उनकी जमानत राशि जब्त हो जाती है।

ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को नोटा से भी कम मिले वोट

सीटउम्मीदवारप्राप्त वोटनोटा
दक्षिणी दिल्लीराजन सिंह3255961
धनबादसुनैना किन्नर34627354
दमोहदुर्गा मौसी11247833

ज्यादा लोगों ने दबाया NOTA का बटन

झारखंड की धनबाद लोकसभा सीट से ट्रांसजेंडर उम्मीदवार को ‘नोटा’ (उक्त में से कोई नहीं) से भी कम वोट मिले हैं। मंगलवार को घोषित चुनाव परिणाम में यह बात सामने आयी। सुनैना किन्नर ने इस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया था और राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों के बड़े उम्मीदवारों को चुनौती दी थी। सुनैना किन्नर को 3462 वोट मिले जबकि 7354 मतदाताओं ने ईवीएम में ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (नोटा) का बटन दबाया।

सुनैना के अलावा मध्य प्रदेश के दमोह से चुनाव लड़ने वाली दुर्गा मौसी को कुल 1124 वोट मिले, जबकि यहां लोगों ने नोटा के लिए 7833 वोट डाले। वहीं राजधानी दिल्ली की दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट पर किन्नर उम्मीदवार राजन सिंह को 325 वोट मिले, यहां नोटा को 5961 वोट पड़े।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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