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चुनाव से पहले बिरसा के गांव में मोदीः मुंडा को बताया भगवान, समझिए क्या है PM का 'मास्टर प्लान'

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Nov 15, 2023, 02:56 PM IST

Chhattisgarh Elections 2023: बिरसा मुंडा को आदिवासियों का भगवान माना जाता है। झारखंड, बिहार और ओडिशा के बड़े हिस्से में लोग उनके विचारों को बहुत दृढ़ता के साथ मानते हैं। वह इकलौते आदिवासी नेता हैं, जिनकी तस्वीर देश की संसद में है।

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बिरसा मुंडा आदिवासियों के गौरव के प्रतीक माने जाते हैं।

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

Chhattisgarh Elections 2023: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा सियासी मास्टरस्ट्रोक चला है। बुधवार (15 नवंबर, 2023) को बिरसा मुंडा के गांव पहुंचकर उन्होंने आदिवासी समाज के बीच बड़ा पैगाम देना चाहा। मुंडा की जयंती और तीसरे 'जनजातीय गौरव दिवस' के मौके पर मोदी ने सूबे के खूंटी से खास तौर से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए 24,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की शुरुआत भी की।

पीएम मोदी ने जिले के बिरसा कॉलेज मैदान से ‘प्रधानमंत्री विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह’ (पीएम पीवीटीजी) मिशन की शुरुआत की, जिसके दायरे में लगभग 28 लाख पीवीटीजी आएंगे। आधिकरिक बयान के अनुसार, मिशन के तहत पीवीटीजी क्षेत्रों में सड़क और दूरसंचार कनेक्टिविटी, बिजली, सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच तथा टिकाऊ आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मोदी ने इसके अलावा देश भर के आठ करोड़ से अधिक लाभार्थी किसानों को पीएम किसान योजना की 15वीं किस्त के रूप में 18,000 करोड़ रुपये भी जारी किए। उन्होंने तीसरे जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर यहां एक बटन दबाकर डिजिटल रूप से राशि हस्तांतरित की। वैसे, सबसे रोचक बात है कि मोदी आजादी के बाद पहले पीएम हैं, जो मुंडा के गांव पहुंचे।

दरअसल, मुंडा के जरिए मोदी आदिवासी समुदाय/वोटबैंक तक अपनी और बीजेपी की जड़ें मजबूत करना चाहते हैं। बेशक उन्होंने इसका आगाज झारखंड से किया हो, मगर इसका सियासी संदेश दूर तक जाएगा। चूंकि, और सूबों में भी विस चुनाव हैं और फिर आगे 2024 में लोकसभा के चुनाव हैं। ऐसे में सियासी जानकार इसे मोदी के मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देख रहे हैं। यह मसला इसलिए भी खास है क्योंकि यह भावनात्मक रूप से आदिवासियों को कनेक्ट कर सकता है।

वैसे, म.प्र में 47, छत्तीसगढ़ में 17, राजस्थान में 25 और तेलंगाना में 12 आदिवासी सीटें। 2018 के चुनाव की बात करें तो म.प्र में कांग्रेस ने 28 तो बीजेपी ने 17 पर जीत हासिल की थी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने 26 तो बीजेपी के हिस्से दो सीटें आई थीं। वहीं, राजस्थान में कांग्रेस के पास 12 और बीजेपी के पाले में नौ सीटें गई थीं, जबकि तेलंगाना में टीआरएस के खाते में छह, कांग्रेस के पास पांच और एक सीट निर्दलीय के हिस्से चली गई थी।

कौन थे बिरसा मुंडा?

बिरसा मुंडा को आदिवासियों का भगवान माना जाता है। झारखंड, बिहार और ओडिशा के बड़े हिस्से में लोग उनके विचारों को बहुत दृढ़ता के साथ मानते हैं। वह इकलौते आदिवासी नेता हैं, जिनकी तस्वीर देश की संसद में है। वह मुंडा जाति के अलावा आदिवासी और अनुसूचित जनजाति के सबसे बड़े प्रतीक के तौर पर देखे जाते हैं।

15 नवंबर, 1875 को खूंटी जिला के उलिहातू में पैदा हुए मुंडा की नौ जून 1900 को रांची की जेल में मृत्यु हो गई थी। 19 साल की उम्र में उन्होंने बिरसा सेना गठित की थी, जबकि लगभग 600 लड़ाके उनके साथ समर्थन में रहते थे। उनको पारंपरिक सेना बनाकर फिरंगियों (अंग्रेजों) और बाहरी लोगों के साथ सीधे लड़ाई में आदिवासियों के साथ नेतृत्व किया था।

अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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