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Pipra Assembly Election 2025: पिपरा (सुपौल) सीट पर क्या है चुनाव समीकरण, क्या इतिहास टूटेगा?

Pipra Assembly Constituency (पिपरा विधानसभा सीट): 2020 विधानसभा चुनाव में पिपरा में 2,89,160 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें 48,289 मुस्लिम मतदाता (16.70%) और 42,362 अनुसूचित जाति मतदाता (14.65%) शामिल थे. यादव समुदाय सबसे प्रभावशाली समूह है, जिनकी संख्या 45,108 (15.60%) है. यह पूरी तरह ग्रामीण सीट है, जहां 2020 में 62.93% मतदान हुआ

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025।

Pipra Assembly Constituency (पिपरा विधानसभा सीट): बिहार के 243 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक सुपौल पिपरा विधानसभा सीट है। सुपौल पिपरा सीट पर इस बार कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 2020 के विधानसभा चुनाव में सुपौल पिपरा सीट पर BJP के उम्मीदवार श्यामबाबू प्रसाद यादव जीते। इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार को 88358 वोट हासिल हुए। 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद इस सीट पर विजयी हुई।

2008 में हुआ इस सीट का गठन

पिपरा विधानसभा क्षेत्र का गठन वर्ष 2008 में हुआ और अब तक यहां तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। 2010 के विधानसभा चुनाव में जद-यू की सुजाता देवी इस सीट पर विजयी हुईं। इस चुनाव में उन्होंने 14,686 वोटों से जीत हासिल की तो 2015 में आरजेडी के यदुवंश कुमार यादव ने भाजपा के विश्व मोहन कुमार को 36,369 वोटों से हराया।

सीट पर जद-यू की पकड़ मजबूत

पिपरा सीट की खासियत है कि अब तक किसी भी पार्टी ने लगातार तीन चुनावों में एक ही उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। जेडीयू की पकड़ पिपरा में मजबूत मानी जाती है। 2020 विधानसभा चुनाव में पिपरा में 2,89,160 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें 48,289 मुस्लिम मतदाता (16.70%) और 42,362 अनुसूचित जाति मतदाता (14.65%) शामिल थे. यादव समुदाय सबसे प्रभावशाली समूह है, जिनकी संख्या 45,108 (15.60%) है. यह पूरी तरह ग्रामीण सीट है, जहां 2020 में 62.93% मतदान हुआ। 2024 में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,11,628 हो गई।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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