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Mahishi Assembly Election 2025: महिषी सीट पर RJD की JDU से सीधी टक्कर, इस जाति के वोटर होंगे जीत के फैक्टर; समझें समीकरण

Mahishi Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार के सहरसा जिले की महिषी विधानसभा सीट अहम राजनीतिक सीटों में से एक मानी जाती है। यहां लगभग 2.65 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। जातीय समीकरण की बात करें तो यादव, मुसलमान, ब्राह्मण और भूमिहार समुदाय का वोट निर्णायक भूमिका निभाता है। यही वजह है कि महिषी विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर पूरे बिहार में दिलचस्पी बनी हुई है। इस बार फिर से आरजेडी और जदयू के बीच सीधी टक्कर है।

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महिषी विधानसभा सीट चुनाव

Mahishi Assembly Election 2025: बिहार की राजनीति में कोसी क्षेत्र हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता आया है। इसी क्षेत्र की एक अहम सीट है महिषी विधानसभा, जो न सिर्फ अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील मानी जाती है। 2025 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यहां की जनता का रुख किस ओर झुकेगा, यह सवाल अभी से चर्चा में है। इस बार यहां पहले चरण में 6 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 14 नवंबर को रिजल्ट घोषित होगा। एनडीए समर्थित जद (यू) उम्मीदवार गुंजेश्वर साह और महागठबंधन की ओर से डॉ गौतम कृष्ण उम्मीदवार हैं। लिहाजा, इस बार फिर चुनावी मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है।

महिषी विधानसभा क्षेत्र सहरसा जिले में स्थित है और मधेपुरा लोकसभा सीट का हिस्सा है। नौहट्टा और सत्तरकटैया प्रखंडों के साथ-साथ महिषी प्रखंड की 11 ग्राम पंचायतों को मिलाकर यह सीट बनी है। मिथिला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, मां उग्रतारा शक्तिपीठ, मंडन भारती धाम और सूर्य मंदिर कंदाहा जैसे धार्मिक स्थल इसे खास पहचान देते हैं। मैथिली यहां की प्रमुख भाषा है और कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यहां विशेषकर धान, मक्का और दाल की खेती होती है।

सहरसा का इतिहास

सहरसा जिले के महिषी प्रखंड में कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं। श्री उग्रतारा स्थान, महिषी गांव में सहरसा स्टेशन से 17 किमी दूर, प्राचीन भगवती तारा मंदिर है, जहां एकजटा और नील सरस्वती की मूर्तियाँ भी पूजी जाती हैं। मंडन भारती धाम वह ऐतिहासिक स्थल है जहां शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच शास्त्रार्थ हुआ, जिसमें मंडन की पत्नी भारती न्यायाधीश थीं। सूर्य मंदिर कंदाहा, 14वीं सदी में कर्नाटक वंश द्वारा निर्मित, सूर्य भगवान की ग्रेनाइट मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है, जिसे कालापहद ने क्षतिग्रस्त किया और लक्ष्मीनाथ गोसाई ने पुनर्निर्मित किया। संत बाबा कारू खिरहरी मंदिर, कोसी नदी तट पर, शिव-भक्त कारू को समर्पित है, और बिहार सरकार इसे प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है।

महिषी सीट का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां जीत का संदेश पूरे कोसी क्षेत्र की राजनीति में दूर तक जाता है। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक धरोहर और जातीय समीकरण, इन तीनों का संगम महिषी को बिहार चुनाव 2025 का हॉटस्पॉट बना देता है।

महिषी सीट पर किस जाति का वर्चस्व

न्यूज एजेसी आईएनएस के हवाले से यहां की राजनीति हमेशा से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। यादव, मुस्लिम और पिछड़ी जातियां यहां का बड़ा वोट बैंक हैं, जो परंपरागत रूप से राजद के साथ जुड़ता रहा है। वहीं, सवर्ण और महादलित समुदायों का रुझान एनडीए की ओर झुकता है। 2020 की जीत ने जदयू को मजबूती दी, लेकिन राजद अभी भी एक बड़े वोट आधार के दम पर चुनौती देने की स्थिति में है।

महिषी विधानसभा सीट का समीकरण

1967 में स्थापित महिषी विधानसभा सीट पर अब तक 14 चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस ने यहां चार बार (1969, 1972, 1980, 1985) जीत दर्ज की। अब्दुल गफूर (जनता दल और बाद में राजद) इस सीट के सबसे प्रभावशाली नेता रहे, जिन्होंने 1995, 2000, 2010 और 2015 में जीत हासिल की। जनता दल और जदयू ने दो-दो बार सफलता पाई। संयुक्त समाजवादी पार्टी, जनता पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी यहां जीत दर्ज की है। 2020 में जदयू के गुंजेश्वर साह ने राजद को शिकस्त दी और इस सीट पर पार्टी का कब्जा जमाया।

महिषी विधानसभा सीट में वोटर कितने हैं?

2024 के चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, महिषी विधानसभा की अनुमानित जनसंख्या 5,19,390 है। कुल 3,06,624 मतदाताओं में 1,57,243 पुरुष, 1,49,376 महिलाएं और 5 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।

महिषी क्षेत्र कोसी नदी की बाढ़ से हर साल जूझता है। सिंचाई, स्वास्थ्य सुविधाएं, और सड़क ढांचा अभी भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं, हालांकि शिक्षा और कनेक्टिविटी में सुधार देखा गया है। 2025 में यहां के मतदाता यह देखेंगे कि किस दल ने बाढ़ नियंत्रण और रोजगार जैसे बुनियादी सवालों को हल करने की ठोस योजना दी है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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