Bihar Assembly Election: टाइम्स नाउ नवभारत की 'इलेक्शन यात्रा' 7 नवंबर यानी शुक्रवार को बिहार में पूर्वी चंपारण के 'मोतीहारी' पहुंची है । यहां की जनता से उनकी राय ली और यहां हवा का रूख किस ओर है इसे जानने का प्रयास किया। बिहार में पहले चरण का मतदान हो गया। करीब करीब आधे बिहार ने आने वाली सरकार की किस्मत को EVM में कैद कर दिया है।
पहले चरण में बंपर वोटिंग कर नया बिहार ने नया रिकॉर्ड बना दिया। अब दूसरे और आखिरी चरण की लड़ाई के लिए दिग्गज मैदान में अपने दावों से वोटर्स को रिझा रहे हैं।
बिहार के वोटर ने ज्यादा भरोसा किस पर जताया है ये तो रिजल्ट में पता चलेगा लेकिन 121 सीटों पर हुई वोटिंग के बाद जहां एक तरफ राजनीतिक पार्टियां अपने अपने दावे कर रही है तो वहीं पब्लिक के मन में क्या चल रहा है । और आखिरी चरण के मतदान में इसका कितना असर होगा...ये जानने के लिए ये जानने के लिए नवभारत की इलेक्शन यात्रा की टीम पूर्वी चंपारण के मोतिहारी पहुंच चुकी है...
चंपारण शुरुआती दौर में कांग्रेस का गढ़ रहा
देश की आजादी में एक अलग रोल निभाना वाला चंपारण शुरुआती दौर में कांग्रेस का गढ़ रहा लेकिन जब से बिहार में जंगलराज की विदाई और सुशासन की एंट्री हुई...तब से यानी 2005 से लगातार यहां बीजेपी का कब्जा है। और अब जबकि बिहार की आधी सीटों पर वोटिंग हो चुकी है...दोनों खेमों की तरफ से जीत के दावे किए जा रहे हैं। NDA तो पहले चरण में ही नतीजों की झलक की बात कह रही है।
तेजस्वी को अपने MY समीकरण पर बहुत भरोसा है
सीमांचल में दूसरे चरण में वोटिंग होगी। तेजस्वी को अपने MY समीकरण पर बहुत भरोसा है। लेकिन ओवैसी की खेल बदलने वाली खुली चुनौती के बाद उनका क्या हाल होगा ये शायद बताने की जरूरत नहीं। बिहार चुनाव का प्रचार अब आखिरी दौर में है। सब अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। महागठबंधन की तरफ से युवाओं को बेहतर कल के सपने दिखाए जा रहे हैं। रोजगार के वादे किए जा रहे हैं तो NDA बिहार के बेहतर वर्तमान को उज्ज्वल भविष्य में बदलने की गारंटी दे रही है और साथ साथ लालू के जंगलराज की याद दिला रही है।
