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करहल की लड़ाई पर खुलकर बोले अखिलेश यादव, अब रिश्तेदारवादी हो गई है भाजपा

BJP vs Samajwadi Party: यूपी की करहल सीट हो रहे उपचुनाव के लिए अखिलेश यादव के जीजा को टिकट देकर भाजपा ने सियासी पारा हाई कर दिया है। इसे लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने खुलकर टिप्पणी की है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा है कि भाजपा अब रिश्तेदारवादी हो गयी है।

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अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना।

Akhilesh Yadav Slams BJP: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाते हुए शुक्रवार को कहा कि भाजपा सपा से आगे निकलकर 'रिश्तेदारवादी' हो गयी है। सपा प्रमुख ने शुक्रवार को करहल विधानसभा क्षेत्र के दिव्हुली में चौधरी नत्थू सिंह यादव डिग्री कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

वहीं, करहल से भाजपा उम्मीदवार अनुजेश यादव के नामांकन में पहुंचे प्रदेश सरकार में समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अखिलेश पर पलटवार करते हुए कहा कि 'यह किसी परिवार के रिश्तेदारों के बीच की लड़ाई नहीं, बल्कि नीतियों की लड़ाई है।'

'रिश्तेदारवादी' हो गई है भाजपा, अखिलेश का दावा

समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' खाते पर अखिलेश यादव के करहल संबोधन का एक अंश पोस्ट किया, 'आज चुनाव के नामांकन का आखिरी दिन है। भाजपा की भी सूची आ गई है। जो नारा वो लगाते थे कि हम लोग परिवारवादी हैं, लेकिन भाजपा अब हम लोगों से और आगे निकल गई है तथा अब वो 'रिश्तेदारवादी' हो गए हैं।'

भाजपा ने करहल विधानसभा सीट पर अखिलेश यादव के चचेरे बहनोई अनुजेश यादव (आजमगढ़ के सांसद धर्मेन्द्र यादव के सगे बहनोई) को अपना उम्मीदवार बनाया है। करहल विधानसभा क्षेत्र 1993 से सपा का गढ़ माना जाता है। इस पर मुलायम सिंह यादव के पोते एवं सपा उम्मीदवार व पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव और भाजपा के अनुजेश यादव के बीच आमना-सामना होगा। यह मुकाबला फूफा और भतीजे के बीच होगा। अनुजेश यादव सपा के तेज प्रताप यादव के रिश्ते में फूफा लगते हैं।

आंतरिक सर्वेक्षण में हार की वजह से चुनाव टालने का आरोप

उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव आगामी 13 नवंबर को होगा और परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इस बीच, सपा मुख्यालय से जारी एक बयान के अनुसार यादव ने करहल में अपने संबोधन में कहा, 'भाजपा जानती है वह करहल और मिल्कीपुर कभी नहीं जीत पायेगी। मिल्कीपुर में तमाम प्रयासों के बावजूद भाजपा आंतरिक सर्वेक्षण में हार रही है इसीलिए वहां चुनाव टाल दिया गया है। भाजपा के लोग करहल का भी गणित जानते हैं कि वे हार रहे हैं।'

सपा प्रमुख ने दावा किया कि 'भाजपा का गठबंधन हारने जा रहा है, भाजपा गठबंधन की महा हार होने जा रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि 'भाजपा सरकार प्रदेश की अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार है। भाजपा के लोगों ने उत्तर प्रदेश को खोखला कर दिया है।' यादव ने कहा कि इस सरकार ने किसानों, नौजवानों, व्यापारियों सभी को धोखा दिया है और मंडियों को बर्बाद कर दिया।

करहल विधानसभा सीट के लिए क्या बोले अखिलेश?

अखिलेश यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, 'सड़कों पर छुट्टा जानवर घूम रहे हैं। इन छुट्टा जानवरों के हमलों से प्रदेश में सैकड़ों मौतें हो चुकी है।' उन्होंने कहा, 'पिछले विधानसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक सप्ताह में छुट्टा जानवरों की समस्या का समाधान करने का वादा किया था, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ।'

अखिलेश यादव ने कहा कि करहल से नेताजी (मुलायम सिंह यादव) और समाजवादियों का बहुत पुराना अटूट रिश्ता है। उन्होंने कहा कि उपचुनाव में करहल में ऐतिहासिक परिणाम आयेगा, तेज प्रताप यादव ऐतिहासिक मतों से जीतेंगे। इस बीच, समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने करहल में अनुजेश यादव के समर्थन में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'यह किसी परिवार के रिश्तेदारों के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि नीतियों की लड़ाई है, सच और झूठ के बीच की लड़ाई है तथा अपराधियों और कानून का पालन करने वालों के बीच की लड़ाई है।'

UP पुलिस में अपर पुलिस महानिदेशक स्तर तक सेवा दे चुके भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी असीम अरुण ने कहा, 'मैंने पुलिस में सेवा की है। एक बार मैं बगल के अलीगढ़ जिले में था और अक्सर पुलिस मैनपुरी या आसपास अपराधियों को गिरफ्तार करती थी। लेकिन पिछले सात वर्षों में, क्या आपने मैनपुरी में ऐसी कोई गिरफ्तारी या अपहरण की घटना सुनी है? ऐसा क्यों? क्योंकि कानून वही है लेकिन लागू करने वाला बदल गया है।'

उन्होंने कहा कि 'यह वही बुलडोजर है जिसे अब सही चालक मिल गया है।' भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करते हुए उन्होंने भीड़ से पूछा कि क्या वे क्षेत्र में जंगलराज वापस चाहते हैं। उन्होंने पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) परिवार को लेकर सपा के आरोप पर भी कटाक्ष किया और कहा कि भाजपा समाज के सभी वर्गों के लिए काम कर रही है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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