इलेक्शन

कांग्रेस और सपा की लड़ाई संयोग या प्रयोग? समझिए अखिलेश यादव का सियासी गुणा-गणित

Samajwadi Party Vs Congress: क्षेत्रीय दलों को न जाने क्यों, मगर कांग्रेस से कुछ ज्यादा ही दिक्कत है। पहले तृणमूल कांग्रेस, फिर आम आमदी पार्टी और अब समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ खुलकर भड़ास निकालनी शुरू कर दी है। अखिलेश यादव के लिए ये संयोग है या फिर उनका कोई सियासी प्रयोग है।

Image

अखिलेश यादव ने कांग्रेस से लड़ाई को क्यों दी तूल? समझिए वजह।

Photo : Times Now Digital

Akhilesh Yadav News: विपक्षी गठबंधन इंडिया में बीते कुछ दिनों से सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। हम साथ-साथ है के दावे करने वाली गठबंधन में सहयोगी पार्टियां और उनके नेता इन दिनों एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन बने हुए हैं। इसमें सबसे चौंकाने वाला नाम अखिलेश यादव और उनकी पार्टी सपा का है, जिन्होंने कांग्रेस से खुलकर जंग छेड़ दी है। उन्हें अब गठबंधन से कोई लेना देना नहीं है। वो अपने इस सख्त लहजे के लिए कांग्रेस के धोखे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, मगर सवाल यही है कि क्या कांग्रेस और सपा के बीच की ये लड़ाई महज संयोग है या प्रयोग है।

अखिलेश-राहुल की लड़ाई के पीछे की क्या है असल वजह

अखिलेश यादव कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें धोखा दिया और सीट बंटवारे के मुद्दे पर पलटी मार दी। यहीं से मनमुटाव बढ़ गया और अखिलेश ने कांग्रेस के यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को चिरकुट नेता करार दिया था। न जाने क्यों, मगर कांग्रेस से क्षेत्रीय दलों को कुछ ज्यादा ही दिक्कत है। पहले तृणमूल कांग्रेस, फिर आम आमदी पार्टी और अब समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ खुलकर भड़ास निकालनी शुरू कर दी। अब तो अखिलेश खुलकर कांग्रेस को भला-बुरा कह रहे हैं। अब जाति जनगणना पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा है। सपा सुप्रीमो ने सोमवार को कहा कि वह कांग्रेस पार्टी ही है जिसने आजादी के बाद जातीय जनगणना नहीं कराई।

एक बार फिर अखिलेश के बयान से विवाद ने पकड़ी तूल

इससे पहले एमपी के कटनी जिले के बहोरीबंद में एक रैली को संबोधित करते हुए यादव ने कांग्रेस पर भी तंज कसा और कहा कि पार्टी की जाति जनगणना की मांग एक ‘चमत्कार’ है। यादव ने राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर कटाक्ष किया जिसमें उन्होंने कहा था कि जाति जनगणना एक ‘एक्स-रे’ की तरह होगी जो देश में विभिन्न समुदायों का विवरण देगी। सपा नेता ने व्यंग्यात्मक ढंग से पूछा, ‘जब एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) और सीटी (कंप्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन जैसी नयी तकनीक उपलब्ध है तो एक्स-रे क्यों?’ यादव ने कहा, ‘सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि कांग्रेस जाति जनगणना के बारे में भी बात कर रही है। जो लोग एक्स-रे के बारे में बात कर रहे हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने आजादी के बाद जाति जनगणना बंद कर दी थी।’

कैसे गिरगिट की तरह बदले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव?

अखिलेश यादव से जब मीडिया ने सवाल पूछा कि इंडिया गठबंधन का क्या होगा? तो उन्होंने अजीबो-गरीब अंदाज में ये कह दिया कि इंडिया गठबंधन आगे देखा जाएगा। इतना बोलकर अखिलेश ने पल्ला झाड़ लिया। हालांकि ये वही अखिलेश यादव हैं जो कुछ दिनों पहले ये कह रहे थे कि '2024 का लोकसभा चुनाव देश के लिए बड़ा परिवर्तनकारी होगा। केन्द्र में ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार बनेगी तो देश बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर और राममनोहर लोहिया के सिद्धांतों और उनके बताए रास्ते पर चलेगा। अगर इससे (इंडिया की सरकार बनाने से) पीछे रह गए तो भाजपा संविधान बदलकर न जाने किस रास्ते पर ले जाएगी।' अब अखिलेश ने अपना रंग गिरगिट की तरह बदल लिया है और वो कह रहे हैं कि इंडिया गठबंधन आगे देखा जाएगा।

कांग्रेस से सपा की लड़ाई मजह संयोग या अखिलेश का प्रयोग?

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उठापटक का दौर जारी है, मगर इस बीच इंडिया गठबंधन में सहयोगी पार्टी पूरी तरह बिखर गई हैं। लोकसभा चुनाव से पहले अखिलेश ने कांग्रेस से अदावत मोल ली है। लोग समझ रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में शुरू हुई ये लड़ाई एक संयोग है, मगर ये अखिलेश यादव का प्रयोग भी हो सकता है। 2024 के चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन में अब तक सीटों पर समझौता नहीं हो सका है, ऐसे में अखिलेश इस कोशिश में हैं कि उनके खाते में यूपी की अधिक से अधिक सीटें आएं। जाहिर है कि कांग्रेस आसानी से इसके लिए राजी नहीं होगी, तो अखिलेश ने दबाव बनाने का सिलसिला तेज कर दिया है, ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे पश्चिम बंगाल में टीएमसी और पंजाब-दिल्ली में आम आदमी पार्टी कर रही है। देखना होगा कि सपा, टीएमसी और आप की कांग्रेस से लड़ाई के बाद भी ये विपक्षी गठबंधन टिकटा है या नहीं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article