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सेंट्रल स्कूलों की तरह नवोदय में क्यों नहीं मिलता EWS बच्चों को एडमिशन? MP हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देशभर के 650 से ज्यादा नवोदय विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को प्रवेश में शामिल न किए जाने पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है।

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why are ews children not granted admission in navodaya schools

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देशभर के 650 से ज्यादा नवोदय विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को प्रवेश में शामिल न किए जाने पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई 17 मार्च को जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में हुई। कोर्ट ने सभी पक्षों को इस संबंध में नोटिस भेजा, अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद की तय की गई है। बता दें, यह याचिका जबलपुर की छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी ने दायर की है।

याचिका में क्या कहा गया है?

याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्यालयों का मकसद गांव और कमजोर वर्ग के होनहार बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है, लेकिन मौजूदा नियमों में EWS वर्ग के छात्रों को शामिल नहीं किया गया है।

याचिका में बताया गया कि अभी नवोदय विद्यालयों में SC, ST, OBC, ग्रामीण क्षेत्र के छात्र, लड़कियां और दिव्यांग छात्रों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है, लेकिन EWS वर्ग के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं है, जिस वजह से यह वर्ग नवोदय में प्रवेश पाने से वंचित है।

EWS वर्ग को शिक्षा संस्थानों में 10% आरक्षण का है नियम

इसके साथ ही याचिका में कहा गया कि 2019 में संविधान के 103वें संशोधन के तहत EWS वर्ग को शिक्षा संस्थानों में 10% आरक्षण देने का नियम बनाया गया था, लेकिन इसे नवोदय विद्यालयों में लागू नहीं किया गया है।

वकील ने कोर्ट को बताया कि शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय विद्यालय (KV) में EWS छात्रों को लाभ दिया जाता है, लेकिन उसी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले नवोदय विद्यालयों में ऐसा नहीं है, जो गलत और भेदभावपूर्ण माना जा रहा है।

देशभर के नवोदय विद्यालयों में लगभग 2.9 लाख

याचिका में एक हालिया कोर्ट फैसले का भी जिक्र किया गया, जिसमें EWS छात्रों को अवसर न मिलना एक गंभीर मुद्दा बताया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, देशभर के नवोदय विद्यालयों में लगभग 2.9 लाख छात्र पढ़ते हैं, और 2019 से अब तक कई EWS छात्र इस सुविधा से वंचित रहे हैं।

वकील का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक छात्र का नहीं, बल्कि पूरे देश के लाखों छात्रों से जुड़ा है। जरूरत पड़ी तो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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