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'सैन्य बलों का बॉस' CAPF क्या है, देश की सुरक्षा में कैसे करता है काम ?

What is CAPF and how it works: सीएपीएफ के बारे में आपने सुना ही होगा। लेकिन आपको बताते हैं कि ये कैसे सेना के अन्य विंग्स से अलग है और इसे सशस्त्र बलों का बॉस क्यों कहा जाता है? असल में सीएपीएफ का काम क्या होता है और देश की सुरक्षा में इसका क्या रोल है? What is CAPF , How CAPF Works

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CAPF Kya hai

What is CAPF : आपने सशस्त्र सेना के कई बलों के बारे में सुना होगा। इसमें CRPF+F, BSF, ITBP और SSB जैसे बल शामिल होते हैं। मगर क्या आपको पता है कि CAPF क्या होता है? इन सारे बलों से ये कैसे अलग है और इसका असल काम क्या है, चलिये इस लेख के जरिये जानते हैं कि सीएपीएफ क्या है... कई लोगों को सीआरपीएफ और सीएपीएफ में भी कन्फ्यूजन हो जाती है। ऐसे में चलिये जानते हैं कि इन दोनों के बीच क्या फर्क है और देश में सीएपीएफ की भूमिका क्या है...

CAPF क्या है ?

सबसे पहले तो ये जान लेते हैं कि सीएपीएफ होता क्या है... दरअसल CAPF का मतलब है सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज। ये गृह मंत्रालय के अधीन आता है, जो मंत्रालय के अधीन ही काम करने वाले अर्धसैनिक बलों का एक समूह है। कई लोग सेना के अलग-अलग विंग्स और सीएपीएफ में कन्फ्यूज हो जाते हैं लेकिन बता दें कि ये कोई बल नहीं बल्कि कई प्रमुख बलों का एक समूह है, जिसे सीएपीएफ कहा जाता है।

CAPF के अंदर कौन-कौन से बल ? Armed Forces in CAPF :

बताते चलें कि CAPF में बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी, असम राइफल्स सीएपीएफ के अंदर आते हैं। यही वजह है कि सीएपीएफ को भारतीय आर्म्ड फोर्सेज का बॉस भी कहा जाता है।

CAPF में सैलरी और भत्ते

बात करें अगर CAPF में बेसिक सैलरी की तो ये 21,700 से शुरू होकर अधिकारी स्तर की 1.3 लाख से लेकर 1.8 लाख तक हो सकती है। ये अलग-अलग पदों पर निर्भर करता है। सीएपीएफ में मेडिकल, आवास (हर जगह पर नहीं), सीएसडी कैंटीन, बच्चों की एजुकेशन फ्री मिलती है।

सीएपीएफ में शामिल होने के लिए ये शर्तें जरूरी

  • सीएपीएफ के लिए आपको सबसे पहले भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • इसके लिए न्यूनतम आयु सीमा 20 साल और अधिकतम आयु सीमा 25 साल होनी चाहिए।
  • आपके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।
Also Read: CAPF और सेना में क्या होता है अंतर, किसे मिलती है ज्यादा सैलरी और सुविधा ?

चर्चा में क्यों सीएपीएफ ?

इन दिनों सीएपीएफ किसी खास वजह के लिए चर्चा में है। सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी सीएपीएफ की सेवा शर्तों को नियमित करने और आईजी व इससे ऊपर के पदों पर आईपीएस अधिकारियों के लिए 50 फीसदी और उससे ज्यादा पदों को आरक्षित करने से संबंधित विधेयक राज्यसभा में पेश किया है।

Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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