Veer Savarkar Biography, Jeevan Parichay In Hindi (वीर सावरकर का जीवन परिचय हिंदी में): स्वातंत्र्य गर्व उनका, जो नर फांको में प्राण गंवाते हैं, पर नहीं बेच मन का प्रकाश रोटी का मोल चुकाते हैं। स्वातंत्र्य गर्व उनका, जिनपर संकट की घात न चलती है तुफानो में जिनकी मशाल कुछ और तेज हो जलती है..... रामधारी सिंह दिनकर साहब की यह कविता वीर सावरकर साहब पर सटीक बैठती हैं। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक महान क्रांतिकारियों ने अपना योगदान दिया, जिनमें वीर सावरकर का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया (Veer Savarkar Biography) जाता है। उनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, समाज सुधारक, इतिहासकार और प्रखर राष्ट्रवादी (Veer Savarkar Biography In Hindi) विचारक थे। सावरकर साहब के साहस और देशभक्ति के कारण उन्हें वीर सावरकर (Veer Savarkar Jivan Parichay) कहा गया। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता और समाज सुधार के कार्यों में समर्पित कर दिया।
Veer Savarkar Biography In Hindi: वीर सावरकर की जीवनी
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 1883 में भागपुर, नासिक गांव में एक ब्राह्मण हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर पंत सावरकर और माता का नाम राधाबाई था। बचपन से ही वे अत्यंत बुद्धिमान और साहसी थे। जब वे छोटे थे, तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया था, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। वे देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे और बचपन में ही उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी। कहा जाता है कि वह अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते थे, यही कारण है कि उन्हें वीर कहकर बुलाया जाने लगा। सावरकर अपने बड़े भाई गणेश से बहुत प्रभावित थे और उनसे प्रेरणा लेते थे। भाई गणेश का सावरकर के जीवन में बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। वीर सावरकर ने 'मित्र मेला' के नाम से एक संगठन की स्थापना की जिसने लोगों को भारत की पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया।
Veer Savarkar Ka Jeevan Parichay: इंग्लैंड के इस कॉलेज से लॉ की डिग्री
उन्होंने फर्ग्यूसन कॉलेज, पुणे, महाराष्ट्र से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की थी। उन्हें इंग्लैंड में लॉ की पढ़ाई करने का प्रस्ताव मिला और उन्हें स्कॉलरशिप की पेशकश भी की गई थी। श्यामजी कृष्ण वर्मा ने उन्हें इंग्लैंड भेजने और पढ़ाई को आगे बढ़ाने में मदद की थी। उन्होंने वहां ग्रेज इन लॉ कॉलेज में दाखिला लिया और इंडिया हाउस में रहने लगे। लंदन में वीर सावरकर ने अपने साथी भारतीय छात्रों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए 'फ्री इंडिया सोसाइटी' का गठन किया।
Veer Savarkar Ka Jivan Parichay: स्कूल के दिनों से स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थे
बता दें सावरकर अपने स्कूल के दिनों से ही स्वतंत्रता आंदोलन का एक हिस्सा थे। जब वह ब्रिटेन में पढ़ने के लिए गए थे, तब ब्रिटेन में मुक्त भारत के लिए समर्पित संगठन फ्री इंडिया सोसाइटी के साथ उनकी निकटता हुई। 1857 के विद्रोह पर उनकी पुस्तक "द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस" ब्रिटेन द्वारा इसकी ब्रिटिश विरोधी सामग्री के लिए प्रतिबंधित कर दी गई थी। ब्रिटिश सरकार ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के कारण वीर सावरकर की ग्रेजुएशन की डिग्री वापस ले ली थी।
13 मार्च 1910 को उन्हें लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया और मुकदमे के लिए भारत भेज दिया गया। हालांकि जब जहाज फ्रांस के मार्सिले पहुंचा, तो सावरकर भाग गए लेकिन फ्रांसीसी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 24 दिसंबर 1910 को उन्हें अंडमान में जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसे काला पानी की सजा कहा जाता था। यहां उन्हें अत्यधिक यातनाएं झेलनी पड़ी। उन्होंने यहां जेल में बंद कैदियों को पढ़ाने का काम भी किया।
स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं समाज सुधारक भी
बता दें वीर सावरकर केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने जाति प्रथा और छुआछूत का विरोध किया। वे मानते थे कि समाज में सभी मनुष्य समान हैं। उन्होंने हिंदू समाज को संगठित करने पर जोर दिया और सामाजिक एकता का संदेश दिया। महिलाओं की शिक्षा और समाज में उनके सम्मान के लिए भी उन्होंने आवाज उठाई।
