Vande Matram History In Hindi: कहानी वंदे मातरम की....
Vande Matram History In Hindi (वंदे मातरम का इतिहास): वंदे मातरम ना केवल एक गीत है बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की (Vande Matram History In Hindi) आत्मा है। यह देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति सम्मान का (Who Wrote Vande Matram) प्रतीक है। इसका प्रत्येक शब्द देश के प्रति समर्पण, सम्मान और गर्व की भावना से भरा (Who Sung Vande Matram First Time) हुआ है। यह गीत भारत की आजादी की लड़ाई का एक ऐसा नारा बना जिसने करोड़ों भारतीयों को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक कर दिया। यह ना केवल भारत की राष्ट्रीय पहचान है बल्कि स्थायी प्रतीक भी है। इसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1870 में लिखा था। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में शामिल है, जो 1872 में प्रकाशित हुआ था। आज यानी 7 नवंबर 2025 को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। देशभर में आज इसकी 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ किया। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में सुबह 9:30 बजे से आयोजित किया गया है। यह गीत देश में एकता और देशभक्ति और युवाओं में एक नई ऊर्जा का प्रतीक बना हुआ है। यह वही गीत है जिसने ना केवल आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी थी बल्कि भारतीय भाषाओं के साहित्य को मजबूती भी दी। ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं बंकिमचंद्र चटोपाध्याय, क्या है वंदे मातरम का इतिहास।
भारतीय राष्ट्रगीत की रचना बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने किया था। वह भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि और देशभक्त थे। बंकिमचंद्र अपने समय के सबसे शिक्षित व प्रखर विचारक माने जाते हैं। उनका जन्म 27 जून 1838 को पश्चिम बंगाल के नैहाटी में हुआ। वह स्कूल के दिनों से ही पढ़ने में बहुत तेज थे। कहा जाता है कि महज 14 वर्ष की आयु में पहली बार उन्होंने संवाद प्रभाकर नाम की एक बंगाली पत्रिका में लिखना शुरू कर दिया था। उन्होंने 1857 में बीए पास की थी। इसके बाद 1869 में कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। कानून की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद उनकी नियुक्ति डिप्टी मजिस्ट्रेट के पद पर हो गई थी। उन्होंने तत्कालीन बंग्ला सरकार में सचिव के पद पर भी कार्य किया। बंकिम बाबू बांग्ला के प्रसिद्ध उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार थे।
बंकिम बाबू ने अपने युवावस्था से ही नौकरी के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी बड़े कार्तिमान बनाए। आनंदमठ लिखने से पहले ही वह 1865 में अपने उपन्यास दुर्गेश नंदनी को लेकर काफी चर्चा में थे। इस उपन्यास ने उनकी लोकप्रियता को काफी बढ़ा दिया था।
बता दें वंदे मातरम गीत पहली बार 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था। यहां वह गीत किसी और ने नहीं बल्कि रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। इसके बाद तो यह गीत आजादी की लड़ाई का नारा बन गया। साल 1905 में बंगाल विभाजन आंदोलन के समय यह गीत पूरे भारत में गूंजने लगा। वहीं आजादी के बाद इस 24 जनवरी 1950 को इस गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया।
कहा जाता है कि वंदे मातरम पहले तीन से चार पंक्तियों का छोटा सा गीत था। इस गीत में भारत की भूमि को माता कहकर संबोधित किया गया था। यह बंग्ला मिश्रित संस्कृत में लिखा गया था। वहीं इतिहासकारों की मानें तो उन्होंने वर्ष 1875 में इस गीत में बदलाव व विस्तार किया। इसे गीत का दूसरा संस्करण भी कहा जाता है। गीत का अंतिम रूप 1881-1882) में आनंदमठ में छापा गया।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने इस गीत में करीब तीन बार बदलाव किया। पहला संस्ककरण 1872-18723 में, दूसरा संस्करण 1875-76 में जिसमें उन्होंने भारत माता को देवी कहकर संबोधित किया। जबकि अंतिम संस्करण में उन्होंने आनंदमठ में 12 पदों वाला पूर्ण गीत पेश किया।