पेपर लीक होने या नकल की खबरें तो आपने भी सुनी होंगी। अक्सर इस तरह की खबरें मीडिया में बनी रहती हैं, इसी वजह से कई राज्य इस बार सख्ती से परीक्षा आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें से एक उत्तराखंड भी है, जहां हाल ही घोषणा हुई है कि राज्य में परीक्षा के दौरान नकल करने वालों की अब खैर नहीं है। यदि कोई पकड़ा गया तो उसे अगले 10 साल तक परीक्षा देने से वंचित रखा जा सकता है।
आएदिन पेपर लीक और नकल की घटनाएं सामने आती हैं, गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड में पटवारी लेखपाल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक मामला भी सामने आया है। इन बातों से परेशान होकर सरकार नया व सख्त कानून लाने की कोशिश में हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि नकल करने वाले उम्मीदवारों या परीक्षार्थियों को 10 साल तक सरकारी एग्जाम देने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से इस बात की जानकारी दी, यहां से करें चेक
ट्वीट में बोला गया है कि भर्ती परीक्षा में नकल करने वाले अभ्यर्थी 10 साल तक किसी भी भर्ती परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि सख्त नकल विरोधी कानून में सरकार द्वारा यह प्रावधान किया जा रहा है।
यह है पूरा मामला
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा हाल ही में पटवारी भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया, लेकिन इसका क्वेश्चन पेपर लीक हो गया था, जिसके बाद से फिर से परीक्षा संचालक या सरकारी की कमियों पर उंगलियां उठने लगी हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार ने फैसला किया कि नकल रोकने के लिए सख्ती के साथ नकल विरोधी कानून बनाया जाए, राज्य के मुख्य सचिव सुखबीर सिंह संधु ने इसकी जानकारी दी जिसमें उन्होंने कहा कि दोषी के लिए उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया जाएगा, जबकि भ्रष्टाचार से बनने वाली संपत्ति को भी सरकार द्वारा जब्त कर लिया जाएगा।
