TET mandatory for teachers working in Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के सरकारी और सहायता प्राप्त (एडेड) स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अब अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद राज्य सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि पात्र इन-सर्विस शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। निर्धारित समय सीमा तक परीक्षा पास नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और संबंधित परीक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे नियमित अंतराल पर, संभव हो तो वर्ष में दो बार, TET परीक्षा आयोजित करें ताकि शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिल सके। अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि 31 अगस्त 2028 के बाद समय-सीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने जिला और खंड स्तर के अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि ऐसे सभी पात्र शिक्षकों का विवरण तैयार किया जाए और उन्हें समय रहते TET परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाए। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी पात्र शिक्षक आवश्यक योग्यता प्राप्त कर लें।
किन शिक्षकों पर लागू होगा आदेश
यह निर्देश उन शिक्षकों पर लागू होगा, जो शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी पांच वर्ष या उससे अधिक का समय शेष है। सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अपने पहले के फैसले को बरकरार रखते हुए अनुपालन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है। अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET की योग्यता हासिल करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों का संवैधानिक अधिकार है और शिक्षक पात्रता परीक्षा शिक्षकों की न्यूनतम गुणवत्ता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय से सेवा में होने के आधार पर किसी शिक्षक को TET से छूट नहीं दी जा सकती। हालांकि व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए शिक्षकों को अतिरिक्त समय दिया गया है।
