राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 12वीं आर्ट्स के परिणाम घोषित होते ही कई घरों में खुशियां और जश्न का माहौल है। लेकिन वहीं दूसरी तरह जैसलमेर जिले के रायमला स्थित सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय के एक छात्र के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है। यहां स्कूल प्रशासन की एक लापरवाही के चलते कक्षा 12वीं आर्ट्स स्ट्रीम के एक या दो नहीं बल्कि 24 छात्र-छात्राओं का परीक्षा परिणाम अटक गया है। जब इन छात्रों ने रिजल्ट जारी होने के बाद बोर्ड की वेबसाइट पर अपना रोल नंबर डालकर नतीजे चेक करने की कोशिश की तो उनकी स्क्रीन पर मार्क्स की बजाए 'RWS' (Result Withheld for Sessional marks) लिखा हुआ दिखाई दिया। इस घटना ने छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
100 की जगह भेजे 20 अंक
जांच में सामने आया है कि इस गड़बड़ी का मुख्य कारण स्कूल स्तर पर सेशनल मार्क्स भेजने में हुई तकनीकी गलती है। जानकारी के अनुसार, G.I.A. विषय के सत्रांक बोर्ड (Session Number Board) को भेजते समय स्कूल प्रशासन ने लापरवाही की थी। नियमानुसार इस विषय के सत्रांक 100 अंकों के आधार पर भेजे जाने थे, लेकिन स्कूल द्वारा इन्हें केवल 20 अंकों के मानक पर भेजा गया। अंकों के इस गणित के कारण ही राजस्थान बोर्ड ने रोल नंबर 3173126 से 3173150 तक के सभी 24 विद्यार्थियों का परिणाम रोक दिया है।
अधिकारियों ने कहा "टेक्निकल एरर"
इस पूरे मामले पर शिक्षा विभाग के अधिकारी ने इसे "टेक्निकल एरर" कहा। जैसलमेर के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) रमेश दत ने बताया कि सत्रांकों के पोर्टल पर अपलोडिंग के दौरान यह समस्या उत्पन्न हुई है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सुधार की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। बताया जा रहा है कि संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल आवश्यक दस्तावेजों और सही अंक टेबल के साथ अजमेर स्थित बोर्ड मुख्यालय आएंगे। वहां व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर रिकॉर्ड दुरुस्त करवाने के बाद ही इन छात्रों का परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया जाएगा।
दो दिन में समाधान का आश्वासन
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि इस त्रुटि को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जा रहा है और आगामी 1-2 दिनों के भीतर सभी प्रभावित छात्रों का रिजल्ट ऑनलाइन अपडेट कर दिया जाएगा। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्र के इन विद्यार्थियों में अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनके हाथों में उनकी फाइनल मार्कशीट नहीं आ जाती, तब तक उनकी बेचैनी कम नहीं होगी। यह घटना अन्य स्कूलों के लिए भी एक सबक है कि बोर्ड परीक्षाओं जैसे संवेदनशील कार्यों में डेटा एंट्री और सत्रांक भेजने में पूरी सावधानी बरती जाए, ताकि विद्यार्थियों को ऐसी मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
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