MBBS New Rule: देशभर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एमबीबीएस कोर्स पूरा करने की अधिकतम समयसीमा को बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव जारी किया है। इसके लिए आयोग ने स्नातक चिकित्सा शिक्षा (संशोधन) विनियम, 2026 का मसौदा अधिसूचना जारी कर सार्वजनिक सुझाव मांगे हैं। 'ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस (अमेंडमेंट) 2023' में यह स्पष्ट किया गया है कि एमबीबीएस छात्रों को अनिवार्य 'रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप' सहित कोर्स पूरा करने के लिए अधिकतम 10 साल का समय मिलेगा। वर्तमान में MBBS कोर्स पूरा करने के लिए अधिकतम 9 वर्ष की सीमा लागू है।
डॉक्टर बनने के लिए मिलेंगे 10 साल
नए प्रस्ताव के अनुसार छात्रों को एक अतिरिक्त वर्ष मिलेगा, जिससे वे विभिन्न कारणों से रुकी या प्रभावित हुई पढ़ाई को पूरा कर सकेंगे। प्रस्तावित 10 वर्ष की अवधि में अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप भी शामिल होगी। हालांकि MBBS के प्रथम प्रोफेशनल (फर्स्ट ईयर) की परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को अधिकतम चार अवसर ही मिलेंगे। इसका मतलब साफ है कि यदि कोई छात्र निर्धारित चार प्रयासों में प्रथम वर्ष की परीक्षा पास नहीं कर पाता है तो उसके लिए आगे की पढ़ाई मुश्किल हो सकती है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो आने वाले वर्षों में हजारों MBBS छात्रों को अपनी मेडिकल शिक्षा पूरी करने के लिए अधिक समय और बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
बता दें कि देश में एमबीबीएस कोर्स की सीटों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है और 2026-27 की सीटों को लेकर फाइनल डेटा तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के लागू होने से वर्ष 2023 से पहले लागू समयसीमा प्रभावी रूप से बहाल हो जाएगी। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष एमबीबीएस की सीटें 1.4 लाख से ज्यादा हो सकती हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कठिन पाठ्यक्रम को देखते हुए समयसीमा बढ़ाने का फैसला छात्रों के हित में माना जा सकता है।
एनएमसी ने मांगे सुझाव और आपत्तियां
NMC ने इस मसौदे पर छात्रों, अभिभावकों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। आयोग द्वारा प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और अभी लागू नहीं हुआ है। यह प्रस्ताव उन छात्रों के लिए राहत लेकर आएगा जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, पारिवारिक परिस्थितियों, परीक्षा में असफलता या अन्य कारणों से पढ़ाई में रुकावट का सामना करना पड़ता है। कई बार छात्र कई कारणों से निर्धारित समय में कोर्स पूरा नहीं कर पाते, जिससे उनका मेडिकल करियर प्रभावित हो जाता है। अगर यह नई व्यवस्था लागू होती है तो उन्हें अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
