NEET UG पेपर लीक और परीक्षा सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी National Testing Agency (NTA) परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक, NTA DG के साथ एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी लगातार बैठकों में परीक्षा की नई तारीख, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य के परीक्षा मॉडल पर चर्चा कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो दोबारा परीक्षा कराने की स्थिति में NEET-UG जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में आयोजित की जा सकती है तारीखों का ऐलान भी अगले एक हफ्ते में कर दिया जाएगा। हालांकि अंतिम फैसला अभी बाकी है, लेकिन एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम समय में पूरी प्रक्रिया को दोबारा सुरक्षित तरीके से पूरा करना है।
NTA के सामने खड़ी हैं ये 5 चुनौतियां
सबसे ज्यादा चर्चा “Hybrid-NEET Model” को लेकर हो रही है। इसे पेपर लीक की घटनाओं को रोकने की दिशा में एक बड़े सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में प्रश्नपत्र पहले की तरह बड़े पैमाने पर प्रिंट होकर ट्रांसपोर्ट नहीं किए जाएंगे, बल्कि एन्क्रिप्टेड डिजिटल फॉर्म में सीधे परीक्षा केंद्रों तक भेजे जाएंगे।
निगरानी कैसे हो
प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक, हर परीक्षा केंद्र पर सुरक्षित सर्वर लगाए जा सकते हैं और परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले सेंटर के भीतर ही हाई-स्पीड प्रिंटर के जरिए प्रश्नपत्र प्रिंट किए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया CCTV निगरानी और कड़ी गोपनीयता के बीच कराए जाने की सिफारिश की जा रही है।
पेपर ट्रांसपोर्टेशन का रिस्क
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे Question paper movement risk यानी प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन के दौरान होने वाले लीक और छेड़छाड़ के खतरे को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है।
CBT मॉडल पर भी विचार
CBT मॉडल की मांग भी इस घटना के बाद तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, NTA कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मॉडल पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए पूरी तरह CBT परीक्षा कराना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा।
रिमोट लोकेशन पर लैब की चुनौतियां
ग्रामीण और छोटे शहरों में कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और बिजली की सीमित व्यवस्था बड़ी चुनौती बन सकती है। कई छात्रों और शिक्षाविदों का मानना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए पेन-पेपर मोड अभी भी ज्यादा सहज और समान अवसर देने वाला माध्यम है। इसी वजह से संभावना जताई जा रही है कि शुरुआत में Hybrid मॉडल लागू किया जाए, जिसमें प्रश्नपत्र की डिजिटल डिलीवरी और सेंटर पर प्रिंटिंग हो, लेकिन परीक्षा फिलहाल OMR आधारित ही रखी जाए। बाद में धीरे-धीरे CBT आधारित NEET की ओर बढ़ने का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
फिर दिमाग में आते हैं वही सवाल
सूत्रों के मुताबिक, अगर दोबारा परीक्षा कराई जाती है तो सबसे पहले नया प्रश्नपत्र तैयार करना होगा। इसके लिए विषय विशेषज्ञों को फिर से बुलाना पड़ेगा और पूरी पेपर सेटिंग प्रक्रिया में समय लग सकता है। इसके बाद सबसे संवेदनशील चरण प्रिंटिंग माना जा रहा है, क्योंकि पिछली घटनाओं में पेपर आउट होने का सबसे बड़ा खतरा इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आया। प्रिंटिंग के बाद सुरक्षित वितरण और परीक्षा आयोजन भी बड़ी चुनौती होगा। यही वजह है कि पूरी प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है। अगर परीक्षा जून के आखिर में या जुलाई में होती है तो रिजल्ट अगस्त-सितंबर तक आने की संभावना है। इसके बाद काउंसिलिंग प्रक्रिया में भी लगभग दो महीने लग सकते हैं। ऐसे में नया मेडिकल अकादमिक सत्र नवंबर-दिसंबर तक शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। मेडिकल शिक्षा का सिलेबस पहले से ही बेहद कठिन होता है। ऐसे में सत्र में देरी होने पर छात्रों के लिए कम समय में पढ़ाई पूरी करना बड़ी चुनौती बन सकता है।
