Who is Responsible for NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा भारत सरकार से अनुमति के बाद रद्द कर दी गई है। बता दें कि कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल लगातार उठाए जा रहे थे। जिसके बाद परीक्षा कराने वाली एजेंसी ने यह बड़ा कदम उठाते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया है। एनटीए के इस फैसले के बाद 23 लाख से ज्यादा छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर एक बार फिर पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन जब परीक्षा की गोपनीयता पर सवाल उठते हैं तो सबसे बड़ा नुकसान मेहनत करने वाले छात्रों का होता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पेपर लीक के लिए जिम्मेदार कौन होता है?
पेपर लीक की पूरी कहानी क्या है?
सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के नासिक में लीक हुए पेपर का पहला सेट बना था और हरियाणा में उसी पेपर के 10 सेट तैयार किए गए थे। हरियाणा से पेपर जयपुर पहुंचा और जयपुर से जमवा रामगढ़ पहुंचा। इसके बाद यहां से सीकर और फिर देश के अन्य राज्य जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल तक पंहुचा यह गेस पेपर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि 720 में से 600 नंबर के प्रश्न इसी गेस पेपर से आए जोकि वाकई चौंकाने वाला है। कहा तो यह भी जा रहा है कि कथित गेस पेपर 30 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक में बेचा गया। राजस्थान SOG ने इस मामले में कई लोगों को पकड़ा और पूछताछ की। देश के अलग अलग राज्यों से भी संदिग्धों की धर पकड़ जारी है।
पेपर लीक के जिम्मेदार कौन
विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी बड़ी परीक्षा का पेपर लीक होना केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं होती, बल्कि इसमें कई स्तरों पर लापरवाही या संगठित नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। परीक्षा प्रक्रिया में पेपर तैयार करने, प्रिंटिंग, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने जैसे कई चरण शामिल होते हैं। अगर इनमें से किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक हो जाए, तो पेपर लीक होने का खतरा बढ़ जाता है। अक्सर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आता है कि पेपर लीक मामलों में प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े लोग, परीक्षा केंद्रों के कर्मचारी, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जुड़े कर्मचारी या फिर दलाल गिरोह शामिल हो सकते हैं। कई बार टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र की फोटो या डिजिटल कॉपी लीक कर दी जाती है। इसके बाद इसे मोटी रकम लेकर छात्रों तक पहुंचाया जाता है।
नीट पेपर लीक कैसे हुआ
कौन खेल रहा लाखों बच्चों के भविष्य से
पेपर लीक केवल परीक्षा प्रणाली पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि यह उन लाखों छात्रों के भरोसे को भी तोड़ता है जो दिन-रात मेहनत करते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है ताकि छात्रों का विश्वास दोबारा कायम हो सके। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पेपर लीक के पीछे संगठित माफिया सक्रिय रहते हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं को कमाई का जरिया बना चुके हैं। ये गिरोह छात्रों और अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए कुछ ही मिनटों में पेपर देशभर में फैल जाता है।
पेपर कराने वाली एजेंसी कटघरे में
हालांकि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की भी बड़ी जिम्मेदारी होती है। अगर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बेहतर हो और हर स्तर पर निगरानी सख्त हो तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। कई विशेषज्ञ परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी, GPS ट्रैकिंग और एन्क्रिप्टेड डिजिटल सिस्टम को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि NTA के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह कहते हैं, “3 मई को हुए पेपर के चार कोड वर्जन थे। कोई भी पेपर मार्केट में नहीं मिला, और कोई लीक भी साबित नहीं हुआ है। जो PDF सर्कुलेट हुआ, उसमें कई सवाल थे, और उनमें से कुछ एग्जाम पेपर के सवालों जैसे ही लग रहे थे। इसलिए, मैं यह नहीं कहूंगा कि पूरा पेपर लीक हो गया था। लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा कि अगर एक भी सवाल हमारे क्वेश्चन पेपर से मैच करता है, तो यह हमारे जीरो टॉलरेंस और जीरो एरर के कमिटमेंट का उल्लंघन है, और हमारे पूरे प्रोसेस से कॉम्प्रोमाइज होता है। हम इसकी जिम्मेदारी लेंगे और उसी के अनुसार एक्शन लेंगे।”
नीट पेपर लीक पर किसने क्या कहा
Khan GS कोचिंग के संस्थापक खान सर ने कहा कि एनटीए के लिए यह सिर्फ एक पेपर है, लेकिन छात्रों के लिए यह उनकी पूरी जिंदगी है। NTA का नाम बदलकर ‘कभी भी भरोसे लायक एजेंसी नहीं’ रख देना चाहिए। उनका पूरा प्रशासनिक सिस्टम बेकार हो चुका है। सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है, लेकिन खान सर ने सीबीआई पर भी सवाल उठाए। वहीं फिजिक्स वाला के फाउंडर अलख पांडे ने ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों का सिस्टम पर भरोसा तोड़ देती हैं और इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम करता है जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए बड़े स्तर पर अवैध कारोबार चलाया जा रहा है।
