NEET PG में नेगेटिव कटऑफ पर बवाल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, NBEMS नोटिस को चुनौती
- Reported by: गौरव श्रीवास्तव
- Updated Jan 17, 2026, 11:20 AM IST
NEET PG 2025 Cut-off Controversy PIL filed in Supreme Court: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET PG 2025 26 में अभूतपूर्व रूप से कटऑफ घटाए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड चिकित्सा विज्ञान यानी NBEMS द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिस में क्वालिफाइंग कटऑफ को बेहद कम स्तर तक घटा दिया गया था, जिसमें कई श्रेणियों में शून्य और यहां तक कि नेगेटिव कटऑफ भी तय कर दी गई। इस फैसले के खिलाफ अब जनहित याचिका दाखिल कर इसे मनमाना, असंवैधानिक और मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया गया है।
NEET PG 2025 Cut off Controversy: नीट पीजी विवाद
NEET PG 2025 Cut-off Controversy PIL filed in Supreme Court: मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET PG 2025 26 में अभूतपूर्व रूप से कटऑफ घटाए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड चिकित्सा विज्ञान यानी NBEMS द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिस में क्वालिफाइंग कटऑफ को बेहद कम स्तर तक घटा दिया गया था, जिसमें कई श्रेणियों में शून्य और यहां तक कि नेगेटिव कटऑफ भी तय कर दी गई। इस फैसले के खिलाफ अब जनहित याचिका दाखिल कर इसे मनमाना, असंवैधानिक और मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया गया है।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत, अधिवक्ता आदर्श सिंह और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड नीमा के माध्यम से अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है।याचिकाकर्ताओं में सामाजिक कार्यकर्ता और किसान नेता हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन डॉ सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ आकाश सोनी शामिल हैं।
याचिका में कहा गया है कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा में न्यूनतम योग्यता मानकों को इस तरह अचानक और असामान्य रूप से घटाना न केवल संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है बल्कि इससे मरीजों की जान को सीधा खतरा पैदा होता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पीजी स्तर पर योग्यता में किसी भी तरह की ढील देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल प्रोफेशन की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से NBEMS के विवादित नोटिफिकेशन को रद्द करने और मेडिकल शिक्षा में न्यूनतम मानकों की रक्षा के लिए उचित दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन अधिनियम 2019 और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों के अनुसार मेडिकल शिक्षा में मेरिट से समझौता नहीं किया जा सकता।
डॉक्टर संगठनों और मेडिकल समुदाय के कई वर्गों ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता ही नहीं होगी तो इसका सीधा असर इलाज की गुणवत्ता पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पीजी डॉक्टरों की ट्रेनिंग सीधे मरीजों की जान से जुड़ी होती है और ऐसे में कटऑफ को शून्य या नेगेटिव करना अभूतपूर्व और चिंताजनक है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अचानक कटऑफ घटाने से उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ है जिन्होंने वर्षों तक कठिन मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की और अपेक्षित योग्यता हासिल की। इससे न केवल मेरिट आधारित प्रणाली कमजोर होती है बल्कि भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह मामला आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध हो सकता है। अदालत से उम्मीद की जा रही है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द सुनवाई कर स्पष्ट दिशा निर्देश देगी।
NEET PG और कटऑफ सिस्टम का अब तक का सफर
NEET PG देश में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों में प्रवेश के लिए एकमात्र राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। इसके जरिए एमडी, एमएस और डिप्लोमा कोर्सों में दाखिला दिया जाता है। अब तक इस परीक्षा में अलग अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम कटऑफ प्रतिशत तय किए जाते रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल योग्य उम्मीदवार ही विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ें।
पिछले कुछ वर्षों में सीटों की संख्या बढ़ने और कुछ राज्यों में सीटें खाली रहने की समस्या सामने आई थी। इसी पृष्ठभूमि में कई बार कटऑफ में मामूली कमी की गई, लेकिन शून्य या नेगेटिव कटऑफ जैसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। इसी कारण NBEMS के 13 जनवरी 2026 के नोटिस ने देश भर में बहस छेड़ दी।