आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल टेक कंपनियों या आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में स्कूलों की कक्षाओं में भी AI की मजबूत मौजूदगी देखने को मिलेगी। इसी दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए गूगल फॉर एजुकेशन के साथ समझौता किया है। इसके तहत राज्य के 4 लाख से अधिक शिक्षकों को AI और डिजिटल तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल करने में मदद मिलेगी और डिजिटल इंडिया के विजन को भी नई मजबूती मिलेगी।
महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा विभाग और गूगल के बीच हुए इस समझौते का उद्देश्य शिक्षकों को भविष्य की तकनीकों से लैस करना है, ताकि वे छात्रों को आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा दे सकें। यह प्रशिक्षण अगले 18 महीनों में चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। शुरुआत में कुछ चुनिंदा मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो बाद में राज्यभर के शिक्षकों को ट्रेनिंग देंगे।
यदि यह परियोजना सफल रहती है तो महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां बड़े पैमाने पर शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण देकर स्कूल शिक्षा में तकनीकी क्रांति लाई जाएगी। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल युग के अनुरूप बनाना समय की जरूरत है।
इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को AI टूल्स, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्मार्ट क्लासरूम तकनीक और नई शिक्षण विधियों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण सामग्री मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध कराई जाएगी ताकि अधिक से अधिक शिक्षक इसका लाभ उठा सकें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप भी मानी जा रही है।
AI आधारित शिक्षण पद्धति से न केवल पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, बल्कि छात्रों में नवाचार और तकनीकी समझ भी विकसित होगी। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी पहल का खर्च गूगल उठाएगा, जिससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
