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समाज बदलना है तो करुणा बढ़ाएं- बेनेट यूनिवर्सिटी के लिटरेचर फेस्टिवल में बोले कैलाश सत्यार्थी

बेनेट यूनिवर्सिटी में आयोजित साहित्यिक उत्सव ‘आलेख 2026 – द कार्निवल ऑफ बुक्स’ में संवाद के दौरान कैलाश सत्यार्थी ने अपनी नई पुस्तक "Karuna: The Power of Compassion" पर भी चर्चा की, जो इस वर्ष प्रकाशित हुई है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक करुणा पर लिखी अन्य पुस्तकों से अलग है।

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बेनेट यूनिवर्सिटी के साहित्य महोत्सव में कैलाश सत्यार्थी

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने गुरुवार (29 जनवरी) को बेनेट यूनिवर्सिटी में आयोजित साहित्यिक उत्सव ‘आलेख 2026 – द कार्निवल ऑफ बुक्स’ के उद्घाटन अवसर पर छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया। यह इस साहित्य महोत्सव का चौथा संस्करण है। अपने संबोधन में सत्यार्थी ने फ्यूचर लीडर्स से करुणा, सफलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी को एक साथ अपनाने का आह्वान किया।

अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि करुणा को केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित न रखकर संस्थागत स्तर और शासन व्यवस्थाओं में भी समझा जाना चाहिए। उन्होंने Times Now Digital से कहा, “करुणा को मापा जा सकता है, और इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि इसे मजबूत किया जा सकता है।”

उन्होंने भविष्य के नेताओं के लिए Compassion Quotient (CQ) को सीखने और अपनाने पर बल दिया। यह एक नया ढांचा है जिसे वे विकसित कर रहे हैं, ताकि करुणा को मापा और बढ़ाया जा सके। उन्होंने समझाया कि Emotional Quotient (EQ) और Intelligence Quotient (IQ) महत्वपूर्ण हैं, लेकिन Compassion Quotient (CQ) व्यक्तियों के साथ-साथ संगठनों, संस्थानों और अदालतों जैसी व्यवस्थाओं में करुणा का आकलन करने में मदद करता है।

संवाद के दौरान सत्यार्थी ने अपनी नई पुस्तक "Karuna: The Power of Compassion" पर भी चर्चा की, जो इस वर्ष प्रकाशित हुई है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक करुणा पर लिखी अन्य पुस्तकों से अलग है, क्योंकि “यह करुणा और तथाकथित ‘सॉफ्ट’ मानवीय गुणों की पुरानी परिभाषा को चुनौती देती है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं तर्क देता हूं कि करुणा कोई कोमल भावना नहीं है। मेरा मानना है कि करुणा कोई कमजोर भावना नहीं है। करुणा एक गतिशील, क्रांतिकारी और परिवर्तनकारी शक्ति है। यही इसका मूल अंतर है। यह समझ केवल मेरे अनुभवों पर नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों के अनुभवों पर आधारित है।”

Gen Z के लिए बाल श्रम पर संदेश

युवा पीढ़ी, विशेषकर Gen Z और Gen Alpha को संबोधित करते हुए सत्यार्थी ने उनसे अपने दैनिक जीवन में बाल श्रम के संकेतों को पहचानने का आग्रह किया- जैसे किसी भोजनालय में खाना खाते समय या अन्य जगहों पर। उन्होंने कहा, “वे जहां भी जाएं- सड़क पर, रेस्टोरेंट में, दुकानों में या किसी मित्र के घर में- अगर वे किसी बच्चे को घरेलू काम या मजदूरी करते देखें, तो उन्हें सेवा स्वीकार करने से इंकार कर देना चाहिए, चाहे वह सिर्फ एक गिलास पानी ही क्यों न हो।” उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को यह महसूस करना चाहिए कि दुनिया भर के सभी बच्चे उनके भाई-बहन हैं।

“उन्हें दुनिया को राजनीतिक व्यवस्थाओं, राष्ट्रीय सीमाओं और धार्मिक विभाजनों से परे देखना चाहिए।” सत्यार्थी ने सोशल मीडिया का उपयोग केवल ट्रेंड्स के लिए नहीं, बल्कि ब्रांड्स, कॉर्पोरेट्स और नीति-निर्माताओं को जवाबदेह बनाने के साधन के रूप में करने को भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “गाजा, फिलिस्तीन और दुनिया के कई अन्य हिस्सों में जो हो रहा है, उस पर बात होनी चाहिए। उन्हें बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं- केवल आवाज उठाना, हैशटैग का उपयोग करना भी मायने रखता है। जो लोग गुलामी या शोषण में फंसे हैं- लड़के और लड़कियां- उन्हें आवाज की जरूरत है। युवाओं को बोलना चाहिए।”

आलेख 2026

यह दो दिवसीय महोत्सव 29 और 30 जनवरी को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विचारकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उभरते लेखकों को एक मंच पर लाया गया। यह कार्यक्रम लर्निंग रिसोर्स सेंटर (LRC) द्वारा Cerebrum Club और School of Liberal Arts के सहयोग से आयोजित किया गया, और इस वर्ष इसकी थीम थी- “The Power of Ink”। कार्यक्रम का उद्घाटन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक कुमार, IPS (सेवानिवृत्त) - उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी और वर्तमान में हरियाणा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति- भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में अन्य विचारकों में पुरस्कार विजेता लेखिका गीता हरिहरन और बेस्टसेलिंग लेखिका स्तुति चांगले शामिल थीं, जिन्होंने “From Page to Pulse” सत्र में साहित्य को आत्म-दर्पण के रूप में प्रस्तुत किया। कर्नल (डॉ.) अरुण कुमार वशिष्ठ ने “written in stone,” पर चर्चा का नेतृत्व किया, जिसमें कालातीत कथाओं की स्थायी शक्ति पर जोर दिया गया। दूसरे दिन कथाकार जितेंद्र गिरधर, लेखिका दीपिका चावला, और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शोधकर्ता Raman Bountra अपने विचार साझा करेंगे।

औपचारिक सत्रों के अलावा, इस कार्निवल में छात्र-केंद्रित गतिविधियां भी हुईं, जैसे “Buzzer & Binge” सत्र, और प्रतियोगिताएं — “13 Reasons Why?”, “Turncoat Debate,” तथा कविता प्रतियोगिता “Wah Wah Kya Baat Hai!” आदि।

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