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सऊदी अरब में भारत की तरह नल से नहीं आता पानी, जानें क्या होता है डीसेलिनेशन ?

How Saudi Arab Desalination works : सऊदी अरब में भारत की तरह पानी नल से नहीं आता है। यहां पर पानी को पीने लायक बनाया जाता है और इस पूरे प्रोसेस को डीसेलिनेशन कहा जाता है।

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What is desalination and how it works

How Saudi Arabia desalination works : रेतीली जमीन और तपती धूप वाले सऊदी अरब के पास खूब पैसा है। यहां चारों तरफ सिर्फ रेत ही रेत है। ना नदियां, ना झीलें और ना ही पानी। तो ऐसे में सवाल उठता है कि सऊदी अरब में पीने का पानी कहां से आता है। सऊदी दुनिया के सबसे गर्म देशों में से एक है। यहां पूरे साल भर में लगभग न के बराबर बारिश होती है। यहां पर न तो ग्लेशियर हैं और न कोई नदी। बावजूद इसके यहां के लग्जरी होटल्स के स्वीमिंग पूल्स हमेशा भरे रहते हैं और लोगों के घरों में 24 घंटे पानी आता है। लेकिन ये सब कैसे संभव है... (What is Desalination)

खाड़ी देशों में पीने के पानी की काफी कमी है क्योंकि यहां पर भारत की तरह नदी या फिर नलों से पानी नहीं आता है। इन देशों में समंदर के खारे पानी को पीने लायक बनाया जाता है। इस तकनीक को डीसेलिनेशन (desalination) कहते हैं। जानें क्या होती है ये पूरी टेक्नोलॉजी और कैसे इसके जरिये पीने का पानी तैयार किया जाता है। आज सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा डीसेलिनेटेड वॉटर प्रोड्यूसर बन चुका है। (How Saudi Arabia desalination works)

शानदार है सऊदी का Desalination सिस्टम

यहां के डीसेलिनेशन प्लांट्स रोजाना करोड़ों लीटर पानी तैयार करते हैं लेकिन ये सस्ता नहीं है। एक लीटर पानी बनाने में बिजली, तेल और लाखों डॉलर की मशीनरी लगती है। लेकिन पानी सिर्फ बनाने ही नहीं बल्कि संभालने से भी आता है। यही वजह है कि इस देश ने वॉटर रीसाइकलिंग प्लांट, आर्टिफिशियल लेक और स्मार्ट एरीगेशन सिस्टम बनाकर हर बूंद का इस्तेमाल करना सीख लिया है। सऊदी अरब सीवेज के पानी तक को रीसाइकिल करके पीने लायक बनाते हैं।

Desalination क्या होता है ?

What is Desalination

चारों तरफ समंदर से घिरा सऊदी अरब

दरअसल, सऊदी के तीनों तरफ समंदर है लेकिन इस समुद्र में पीने लायक पानी नहीं है। इसलिये इन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर डीसेलिनेशन प्लांट लगा दिया। जहां पर समंदर के पानी को सबसे पहले गर्म किया जाता है। जिसके बाद पानी भाप बन जाता है और नमक नीचे रह जाता है। फिर इसी भाप को ठंडा कर पीने का पानी बनता है। इसी से यहां के लोगों को पीने का पानी मिलता है।

डीसेलिनेशन से प्रदूषित होते समंदर

सऊदी अरब सोलर एनर्जी से इन डीसेलिनेशन प्लांट्स को चला रहे हैं, ताकि बिजली की भी खपत कम हो और प्रदूषण भी ना फैले। हालांकि ये भी सच है कि इस प्रोसेस से समंदर में कैमिकल वेस्ट बढ़ता जा रहा है। हालांकि समय के साथ सऊदी अरब इसका भी उपाय खोजने में लगा हुआ है। रेगिस्तान में पानी बनाना आसान नहीं है। लेकिन सऊदी अरब ने इसे अपनी शानदार टेक्नोलॉजी से करके दिखाया है।

Kusum Bhatt
कुसुम भट्ट author

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्... और देखें

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