Explained: दुनिया को भा रही भारत की पढ़ाई, जानें कैसे ग्लोबल स्टडी का हब बन रहा India
- Authored by: कुलदीप राघव
- Updated Dec 5, 2025, 12:57 PM IST
एक समय था जब विश्वगुरु भारत को ज्ञान का केंद्र माना जाता था और यहां के विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने बड़ी संख्या में विदेशी छात्र आते थे। चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, मंगोलिया, श्रीलंका और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे दूर-दराज के देशों से लोग यहां ज्ञान लेने पहुंचते थे। अब एक बार फिर भारत में शिक्षा का परिदृश्य और स्तर बदल रहा है और यह पुन: विश्वगुरु बनने की राह पर चल पड़ा है। नई शिक्षा नीति, टेक-ड्रिवन लर्निंग और स्किल बेस्ड एजुकेशन भारत की एकेडमिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।
ग्लोबल स्टडी का हब बन रहा भारत (Image: Canva)
Study in India: एक समय था जब विश्वगुरु भारत को ज्ञान का केंद्र माना जाता था और यहां के विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने बड़ी संख्या में विदेशी छात्र आते थे। चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, मंगोलिया, श्रीलंका और दक्षिण पूर्व एशिया जैसे दूर-दराज के देशों से लोग यहां ज्ञान लेने पहुंचते थे। अब एक बार फिर भारत में शिक्षा का परिदृश्य और स्तर बदल रहा है और यह पुन: विश्वगुरु बनने की राह पर चल पड़ा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, किफायती फीस, अत्याधुनिक रिसर्च सुविधाएं और सुरक्षित-सशक्त वातावरण ने भारत को ग्लोबल स्टडी का नया हब बना दिया है। आज एशिया, अफ्रीका, यूरोप से हजारों छात्र भारतीय विश्वविद्यालयों का रुख कर रहे हैं।नई शिक्षा नीति, टेक-ड्रिवन लर्निंग और स्किल बेस्ड एजुकेशन भारत की एकेडमिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।
भारत में पढ़ रहे 200 देशों के 72,218 विदेशी छात्र
केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि वर्तमान में करीब 200 देशों के 72,218 विदेशी छात्र भारतीय हायर एजुकेशन संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। प्रश्नकाल के दौरान सप्लीमेंट्री सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस बात की जानकारी दी। विदेशी छात्रों की यह संख्या बताती है कि दुनिया नये भारत के एकेडमिक मॉडल पर भरोसा जता रही है। यही वजह है कि “स्टडी इन इंडिया” दुनिया को आकर्षित कर रहा है और भारत वैश्विक ज्ञान-गंतव्य बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

भारत में पढ़ रहे 200 देशों के 72,218 विदेशी छात्र
ग्लोबल विजिबिलिटी का फायदा
शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार का कहना है कि भारतीय हायर एजुकेशन ने “ग्लोबल विजिबिलिटी' में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में भारत के 54 संस्थानों को जगह मिली है, जबकि 2014-15 में यह संख्या केवल 11 थी। यह अब तक का सबसे मजबूत भारतीय प्रतिनिधित्व है। शिक्षा राज्य मंत्री का कहना है कि सरकार विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग बढ़ाकर अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

QS Asia University Rankings 2026 (Image- CANVA)
QS Asia University Rankings 2026 (नवंबर 2025)
- बड़ी छलांग: 2016 में 24 की तुलना में अब 294 भारतीय संस्थान QS एशिया रैंकिंग में हैं, जो चीन के बाद दूसरा स्थान है।
- टॉप संस्थान: IIT दिल्ली, IISc बेंगलुरु, IIT मद्रास, IIT बॉम्बे, IIT कानपुर, IIT खड़गपुर टॉप 100 में शामिल हैं।
- अच्छा प्रदर्शन: दिल्ली विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, UPES, VIT, JNU जैसे संस्थान भी टॉप 150 में हैं।
स्टडी का ग्लोबल हब बन रहा भारत
QS World University Rankings 2026 में भारत के 54 संस्थानों ने जगह बनाई। 2025 की इस रैंकिंग में भारत के 46 संस्थान शामिल थे, जबकि इससे पहले 2015 में सिर्फ 11 संस्थान थे। वहीं, QS Asia Rankings 2026 में भारत के 294 संस्थानों ने जगह बनाई। यह संख्या 2016 में मात्र 24 थी। क्यूएस यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुसार एशिया की टॉप 100 यूनिवर्सिटीज में पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु और दिल्ली यूनिवर्सिटी को जगह दी गई।
QS World University Rankings 2026 (जून 2025)
- कुल उपस्थिति: भारत के 54 संस्थानों ने इस रैंकिंग में जगह बनाई।
- IISc शीर्ष: भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु 201-250 रेंज में सबसे ऊपर है, जबकि IITs 200-1000 की रेंज में हैं।
‘वर्ल्ड क्लास इंस्टिट्यूशन’ स्कीम पर काम कर ही सरकार
भारत को ग्लोबल स्टडी हब बनाने के लिए ‘वर्ल्ड क्लास इंस्टिट्यूशन’ स्कीम के तहत इंस्टिट्यूशन ऑफ एमिनेंस (IoE) को समर्थन देने के लिए 8 सार्वजनिक संस्थानों को 6,198.99 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। वर्ल्ड क्लास इंस्टिट्यूशन स्कीम का उद्देश्य 10 पब्लिक और 10 प्राइवेट हायर एजुकेशन संस्थानों की पहचान कर उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षण और रिसर्च केंद्र के रूप में विकसित करना है। अब तक 12 संस्थानों को इंस्टिट्यूशन ऑफ एमिनेंस (IoE) के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिनमें 8 सार्वजनिक और 4 निजी क्षेत्र से हैं।

QS World University Rankings by Subject 2025 (Image: Canva)
QS World University Rankings by Subject 2025 (सितंबर 2025)
- भारत की रैंक: भारत के 79 विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिनमें से 9 संस्थानों ने दुनिया के शीर्ष 50 में जगह बनाई है और कुल 37 भारतीय शिक्षण संस्थानों ने विभिन्न विषयों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
- टॉप बिजनेस स्कूल: IIM अहमदाबाद (58वां), IIM कलकत्ता (64वां) जैसे संस्थान एशिया के टॉप 10 में हैं।
- तकनीकी क्षेत्र: डेटा साइंस और AI में IIT मद्रास व VIT टॉप 100 में।
किस देश के छात्र सबसे ज्यादा
भारत में ज्यादातर स्टूडेंट्स साउथ एशिया से ही आते हैं। इनमें भी नेपाल से सबसे ज्यादा स्टूडेंट भारत में पढ़ाई के लिए आते हैं। स्टडी इन इंडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया के 200 देशों से छात्र भारत में पढ़ाई करने आते हैं, जिसमें सर्वाधिक संख्या नेपाल से है।
- नेपालः 13126 स्टूडेंट्स
- अफगानिस्तानः 3151 स्टूडेंट्स
- अमेरिकाः 2893 स्टूडेंट्स
- बांग्लादेशः 2606 स्टूडेंट्स
- संयुक्त अरब अमीरातः 2287 स्टूडेंट्स
कौन सा कोर्स और राज्य विदेशी छात्रों की पहली पसंद
ऑल इंडिया सर्वे फॉर हायर एजुकेशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सबसे ज्यादा विदेशी छात्र कर्नाटक में पढ़ते हैं। कर्नाटक में छह हजार से ज्यादा विदेशी छात्र पढ़ाई करते हैं। विदेशी छात्रों की दूसरी पसंद पंजाब है। इन दोनों राज्यों के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली भी विदेशी छात्रों की पसंद बने हुए हैं। कोर्स की बात करें तो विदेशी छात्रों का सर्वाधिक एलरोलमेंट इंजीनियरिंग के कोर्स के लिए होता है।वहीं विदेशी छात्रों की दूसरी पसंद मैनेजमेंट कोर्स हैं। AISHE रिपोर्ट के अनुसार, विदेश से भारत पढ़ाई करने आने वाले छात्रों में से 74.8 प्रतिशत छात्र अंडर ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन लेते हैं और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में 15.8 प्रतिशत।

एजुकेशन हब बनाने की तैयारी (Photo: Canva)
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी से राह हुई आसान
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 ने भारत को ग्लोबल स्टडी हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है। इस नीति ने शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने, रिसर्च और इनोवेशन को मजबूत करने पर जोर दिया। मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन, क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम और इंटरनेशनलाइजेशन जैसे सुधारों ने भारत के संस्थानों को विदेशी छात्रों की पसंद बनाया। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री-एकेडेमिपार्टनरशिप और डिजिटल लर्निंग के विस्तार ने भारत की वैश्विक रैंकिंग को बढ़ाया, जिससे भारत तेजी से एक उभरता हुआ ग्लोबल स्टडी हब बन रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने भी जानकारी दी कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, मजबूत रिसर्च-इनोवेशन इकोसिस्टम और प्लेसमेंट आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। मंत्रालय के अनुसार, NEP के सुधारों का सीधा प्रभाव वैश्विक रैंकिंग में भारत के प्रदर्शन पर दिखाई दे रहा है जोकि काफी सुखद संकेत है।