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CBSE विवाद ने बढाई पैरेंट्स की टेंशन, IB और ICSE बोर्ड की तरफ झुकाव के संकेत

पिछले कुछ सालों में आईबी (IB) और आईसीएसई (ICSE) जैसे बोर्ड्स की लोकप्रियता महानगरों और बड़े शहरों में ज्यादा बढ़ी है। हालांकि सीबीएसई फिर भी देश का सबसे बड़ा बोर्ड है लेकिन हालिया मामलों और विवादों ने अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए कुछ ऑप्शन पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

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CBSE Re-Evaluation : सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और री-चेकिंग प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में उठे विवाद ने लाखों छात्रों की परेशान तो बढ़ाई ही लेकिन इस मामले से पेरेंट्स भी काफी परेशान हैं। आंसर शीट्स में गड़बड़ियों, री-इवैल्युएशन पोर्टल से जुड़ी शिकायतों और सोशल मीडिया पर सामने आए कई मामलों के बाद अब शिक्षा जगत में एक नई बहस शुरू हो गई है। सवाल ये उठ रहा है कि क्या इस देश का सबसे बड़ा बोर्ड अभिभावकों का भरोसा बरकरार रख पाएगा, या फिर ये विवाद एक निजी और इंटरनेशनल बोर्ड्स की तरफ रुख करने की सोच को बढ़ावा देगा ?

खामियों ने बोर्ड बदलने पर किया मजबूर

पिछले कुछ सालों में आईबी (IB) और आईसीएसई (ICSE) जैसे बोर्ड्स की लोकप्रियता महानगरों और बड़े शहरों में ज्यादा बढ़ी है। हालांकि सीबीएसई फिर भी देश का सबसे बड़ा बोर्ड है लेकिन हालिया मामलों और विवादों ने अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए कुछ ऑप्शन पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

क्या बोले अभिभावक ?

मसूरी में रहने वाली जेयान भट्ट ने इसी साल अपनी बेटी का एडमिशन ICSE बोर्ड में करवाया है। इस पूरे विवाद पर उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि मैं पिछले साल तक अपनी बेटी के एडमिशन के बारे में काफी सोच रही थी। फिर परिवार के साथ बातचीत कर हमने बेटी को ICSE में पढ़ाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ जो भी नाइंसाफी हुई वो काफी गलत है। OSM पर हुए पूरे विवाद के बारे में पता चला। मेरे कई दोस्त हैं, जिनके बच्चे CBSE बोर्ड में पढ़ते हैं और उन्होंने बताया कि रीइव्लैयूएशन के समय उन्हें काफी दिक्कत हुई। हालांकि वे आश्वस्त हैं कि जल्द ही बोर्ड में सब चीजें ठीक हो जाएंगी।

सीबीएसई विवाद से क्या टूटेगा पेरेंट्स का भरोसा ?

सीबीएसई विवाद से क्या टूटेगा पेरेंट्स का भरोसा ?

टाइम्स नाऊ नवभारत से बात करते हुए गाजियाबाद के बिजनेसमैन विकास कुमार कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि उन्हें बोर्ड से कोई नाराजगी नहीं है। विकास कुमार के दो बच्चे हैं और दोनों ही 9वीं और 11वीं कक्षा में पढ़ते हैं। अगले साल दोनों बोर्ड परीक्षाएं देंगे। विकास कुमार में बातचीत में उन्होंने बताया कि कमी हायर लेवल पर हुई है। अगर गलती हुई है तो जाहिर तौर पर इसमें सुधार भी होगा। लेकिन बोर्ड बदल देना बच्चों के साथ सही नहीं है।

क्या ICSE की मिलेगी गारंटी ?

विकास कहते हैं कि एक स्कूल बदल देने भर से ही बच्चों पर उसका असर देखने को मिलता है। ये तो फिर भी एक बोर्ड की बात हो रही है। OSM पर बात करते हुए विकास कहते हैं कि जिस कंपनी को टेंडर दिया गया था, खामियां उसमें हैं। ऐसा जरूरी तो नहीं कि ये गलती फिर से हो। अगर भविष्य में मैं अपने बच्चों का एडमिशन ICSE में करवाता हूं तो कोई गारंटी नहीं है कि वहां पर ऐसा कोई विवाद नहीं होगा। ऐसे में उन्होंने CBSE पर अपना भरोसा जताते हुए कहा कि खामियां निश्चित तौर पर दूर होंगी। लेकिन बच्चों का बोर्ड बदलने जैसा कोई विचार नहीं है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स ?

एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि किसी भी बोर्ड की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता होती है। जब परीक्षा, मूल्यांकन और परिणामों को लेकर सवाल खड़े होते हैं तो इसका सीधा असर छात्रों और अभिभावकों के भरोसे पर पड़ता है। खासतौर पर 10वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्रों के माता पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर ज्यादा संवेदनशील रहते हैं।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारी ये भी मानते हैं कि किसी एक विवाद के आधार पर पूरे बोर्ड की व्यवस्था पर सवाल खड़े करना काफी जल्दबाजी होगी। सीबीएसई ने भी अलग-अलग आरोपों पर अपना पक्ष रखा है और कई मामलों में स्पष्टीकरण जारी किया है।

Kusum Bhatt
कुसुम भट्ट author

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्... और देखें

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