2004 में पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में माहिर माने जाते हैं जोशी।
कैसा रहा राजनीतिक सफर?Pralhad Joshi: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। कर्नाटक से छह बार लोकसभा सांसद रहे प्रह्लाद जोशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। चुनावी राजनीति में लगातार सफलता हासिल करने वाले प्रह्लाद जोशी हमेशा भाजपा के भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे हैं। प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (तत्कालीन बीजापुर) में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। शुरुआती शिक्षा उन्होंने हुबली में प्राप्त की। इसके बाद धारवाड़ स्थित कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध के.एस. आर्ट्स कॉलेज, हुबली से उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की डिग्री हासिल की।
सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले जोशी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा और संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए धीरे-धीरे पार्टी के शीर्ष नेताओं में अपनी जगह बनाई।
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
कैसा रहा राजनीतिक सफर?
प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक करियर करीब तीन दशक लंबा है। उन्होंने कर्नाटक भाजपा संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
- 2004 में पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
- इसके बाद लगातार कई बार इसी सीट से जीत दर्ज की।
- संसद में संसदीय कार्यों और संगठनात्मक क्षमता के कारण उनकी अलग पहचान बनी।
- भाजपा ने उन्हें कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी थी।
लगातार चुनाव जीतने और संगठन में मजबूत पकड़ के कारण वह पार्टी नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हैं।
केंद्र सरकार में कौन-कौन से मंत्रालय संभाल चुके हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में प्रह्लाद जोशी को कई अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। उन्होंने अलग-अलग समय पर इन मंत्रालयों की कमान संभाली है।
- संसदीय कार्य मंत्रालय
- कोयला मंत्रालय
- खान मंत्रालय
- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
संगठन में क्यों माने जाते हैं भरोसेमंद नेता?
भाजपा में प्रह्लाद जोशी की पहचान एक ऐसे नेता की रही है, जो कम बोलते हैं, लेकिन संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में माहिर माने जाते हैं।
संसदीय कार्य मंत्री रहते हुए उन्होंने संसद के दोनों सदनों में सरकार की रणनीति को प्रभावी ढंग से संभाला। विपक्ष के साथ संवाद और सदन के संचालन में उनकी भूमिका कई बार चर्चा में रही। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें संकट की परिस्थितियों में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपता रहा है।
संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में माहिर माने जाते हैं प्रह्लाद जोशी।
नई जिम्मेदारी में सबसे बड़ी चुनौतियां क्या होंगी?
शिक्षा मंत्रालय संभालते ही उनके सामने कई अहम चुनौतियां होंगी।
1. परीक्षा प्रणाली में सुधार
हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का प्रभावी क्रियान्वयन
नई शिक्षा नीति को राज्यों और विश्वविद्यालयों में पूरी तरह लागू करना भी बड़ी चुनौती होगी।
3. डिजिटल शिक्षा को मजबूत करना
ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीक आधारित सीखने की व्यवस्था को और बेहतर बनाना होगा।
4. छात्रों का भरोसा बहाल करना
हाल के विवादों के बाद छात्रों और अभिभावकों का विश्वास दोबारा जीतना सरकार के लिए अहम होगा।
क्या बदलेगी शिक्षा मंत्रालय की कार्यशैली?
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रह्लाद जोशी का प्रशासनिक अनुभव मंत्रालय के फैसलों को गति दे सकता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार उन्हें केवल अतिरिक्त प्रभार तक सीमित रखती है या भविष्य में पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री नियुक्त करती है।क्या है उनकी कार्यशैली?प्रह्लाद जोशी की पहचान एक लो-प्रोफाइल लेकिन परिणाम देने वाले नेता के रूप में होती है। वह मीडिया में कम दिखाई देते हैं, लेकिन संगठन और प्रशासन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
उनकी यही शैली शिक्षा मंत्रालय जैसे संवेदनशील विभाग में भी देखने को मिल सकती है, जहां फिलहाल सबसे ज्यादा जरूरत तेज फैसलों और प्रभावी क्रियान्वयन की है।
प्रह्लाद जोशी की पहचान एक लो-प्रोफाइल नेता के रूप में है।
शिक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद क्या बोले प्रह्लाद जोशी?
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा कि वे इस कर्तव्य को पूरी विनम्रता और जिम्मेदारी के साथ निभाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। पदभार ग्रहण करने के बाद जोशी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने मुझ पर भरोसा जताया है और मुझे इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। मैं पूरी विनम्रता और दृढ़ जिम्मेदारी की भावना के साथ इस कर्तव्य को पूरा करूंगा।”
