CBSE Release Curriculum For Class 9 to 11 on April 2: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 9 से 11 तक के छात्रों के लिए नया पाठ्यक्रम (करिकुलम) जारी कर दिया है। नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही इस करिकुलम का इंतजार छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों को लंबे समय से था। दरअसल, नए सत्र की शुरुआत के बावजूद कई स्कूलों में कक्षा 9 के छात्रों के लिए किताबें और क्लियर सिलेबस उपलब्ध नहीं था, जिससे पढ़ाई शुरू करने में दिक्कतें आ रही थीं। यही वजह है कि CBSE का यह नया करिकुलम छात्रों और शिक्षकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। जारी सिलेबस में सबसे बड़ा बदलाव तीन भाषा फॉर्मूला (3 Language Formula) को लेकर है। अब कक्षा 10 तक छात्रों के लिए तीसरी भाषा पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। छात्र हिंदी, अंग्रेजी के अलावा अन्य भारतीय या विदेशी भाषाओं में से तीसरी भाषा चुन सकेंगे। खास बात यह है कि अलग-अलग स्तरों पर एक ही भाषा को दोहराया नहीं जा सकेगा। नए सिलेबस में पढ़ाई के तरीके पर भी खास जोर दिया गया है। अब रटने के बजाय कंसेप्ट आधारित और अनुभवात्मक (experiential) लर्निंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
CBSE का यह कदम शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है, जिसमें पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ आधुनिक और व्यावहारिक ज्ञान को भी समान महत्व दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE द्वारा जारी किया जाने वाला यह नया सिलेबस National Council of Educational Research and Training के नए ढांचे और National Education Policy 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें पारंपरिक रटने की बजाय कॉन्सेप्ट आधारित और स्किल-आधारित शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
गणित और विज्ञान के दो स्तर
CBSE ने गणित और विज्ञान में दो स्तर (Levels) लागू करने की तैयारी की है। सभी छात्र सामान्य स्तर (Standard) का पाठ्यक्रम पढ़ेंगे, लेकिन जो छात्र अधिक गहराई से पढ़ना चाहते हैं, वे एडवांस लेवल (Advanced) का विकल्प चुन सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों को भविष्य के लिए बेहतर तैयार करेगा, खासकर ऐसे समय में जब नई तकनीकों और स्किल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके अलावा, स्कूलों को भी निर्देश दिए जाएंगे कि वे नए सिलेबस के अनुसार शिक्षण पद्धति में बदलाव करें और छात्रों को एक्टिव लर्निंग के लिए प्रोत्साहित करें।
नई पाठ्यक्रम व्यवस्था में छात्रों की समझ, विश्लेषण क्षमता और प्रैक्टिकल नॉलेज को बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा। विषयों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि छात्र सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी ज्ञान का उपयोग कर सकें।
हालांकि, सिलेबस जारी होने में देरी के कारण कई स्कूलों और अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब उम्मीद है कि 2 अप्रैल को करिकुलम जारी होने के बाद पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू हो सकेगी और छात्रों को स्पष्ट दिशा मिल पाएगी।
