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टीचर भर्ती में आयु सीमा छूट मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा रुख, प्रदेश सरकार और UPESSC से मांगा जवाब

यूपी में टीचर भर्ती के लिए जारी नोटिस के बाद ओवरएज उम्मीदवारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट आयु सीमा में छूट की मांग को लेकर याचिका दायर की। इसका सुनवाई कर कोर्स ने राज्य सरकार और UPESSC से जवाब मांगा है।

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टीचर भर्ती में आयु सीमा छूट मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा रुख (Photo - AI/Newsroom Verified)

उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देखने वाले और लंबे समय से सरकारी भर्तियों का इंतजार कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पदों पर होने वाली बंपर भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट देने की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का सख्त आदेश दिया है। इस न्यायिक हस्तक्षेप से उन तमाम ओवरएज हो चुके अभ्यर्थियों के मन में एक नई उम्मीद जाग गई है, जो पिछले कई वर्षों से भर्ती न आने के कारण मायूस थे।

क्या है पूरा मामला और याचिका का आधार?

शिव सिंह व अन्य की ओर से दायर इस याचिका में अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 15 सितंबर को सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पदों पर विज्ञापन जारी किया गया था। इस विज्ञापन में आयु सीमा में किसी प्रकार की विशेष छूट या प्रावधान नहीं दिया गया था, जबकि नियमावली 1992 के नियम-3 के अनुसार राज्य सरकार के पास यह अधिकार है कि वह विशेष परिस्थितियों या लंबे अंतराल के बाद आने वाली भर्तियों में सभी वर्गों के लिए एक बार बतौर अपवाद आयु में छूट प्रदान कर सकती है। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी मुख्य तर्क दिया गया कि इससे पहले इस तरह की शिक्षक भर्ती वर्ष 2018 में आई थी, और उसके लगभग 8 साल के लंबे अंतराल के बाद अब वर्ष 2026 में यह भर्ती निकाली गई है। इन आठ वर्षों के दौरान राज्य सरकार द्वारा कोई नई भर्ती प्रक्रिया आयोजित न किए जाने के कारण अधिकांश युवा निर्धारित आयु सीमा पार करके ओवरएज हो चुके हैं।

अगली सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चयन आयोग को अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, और इस महत्वपूर्ण याचिका पर अगली सुनवाई आगामी 18 नवंबर को तय की गई है। अदालत के इस रुख से यह तो स्पष्ट है कि यदि सरकार की तरफ से कोई ठोस संतोषजनक पक्ष नहीं रखा गया, तो हजारों अभ्यर्थियों को आयु सीमा में राहत मिलने का रास्ता साफ हो सकेगा।

प्रतियोगी छात्रों के लिए इसका क्या महत्व है?

ओवरएज अभ्‍यर्थियों के लिए उम्मीद की किरण - पिछले कई वर्षों से नियमित भर्तियां न आने के कारण लाखों युवा ओवरएज की समस्या से जूझ रहे हैं। हाईकोर्ट के इस नोटिस से न्याय मिलने की आस बंध गई है।

भर्ती नियमों की पारदर्शिता - इस प्रकार के कानूनी मामले यह दर्शाते हैं कि लंबे अंतराल के बाद निकलने वाली रिक्तियों में कोविड या अन्य प्रशासनिक कारणों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए आयु सीमा में एकमुश्त छूट मिलना कितना आवश्यक है।

आगामी तारीख पर नजर - जिन अभ्यर्थियों का भविष्य इस भर्ती से जुड़ा है, वे 18 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई के फैसलों और आयोग के रुख पर अपनी पैनी नजर बनाए रखें।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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