क्राइम

Crime: बच्चे के रोने पर मां का चढ़ा पारा, पानी की टंकी में फेंक मौत के घाट उतारा; पुलिस के साथ खेलती रही माइंड गेम

गुजरात के अहमदाबाद में नवजात बच्चे के लगातार रोने पर तैश में आई में उसकी हत्या कर पानी की टंकी में फेंक दिया। इस दौरान वह पुलिस को भी बच्चे के गुमशुदा होने की कहानी पर उलझा कर रखा।

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(सांकेतिक फोटो)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

अहमदाबाद में 22 वर्षीय एक महिला को अपने नवजात बेटे को भूमिगत पानी की टंकी में फेंक कर कथित रूप से हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, क्योंकि वह उसके ‘लगातार रोने’ से परेशान थी। मेघानीनगर पुलिस थाने के इंस्पेक्टर डी.बी. बसिया ने बताया कि करिश्मा बघेल ने पिछले शनिवार को दावा किया था कि उनका तीन महीने का बेटा ख्याल कहीं मिल नहीं रहा। इसके बाद उनके पति दिलीप ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। तलाश के बाद पुलिस को सोमवार (सात अप्रैल) को अंबिकानगर इलाके में उनके घर के पानी के टैंक में बच्चे का शव मिला।

इस बात से परेशान थी महिला

बसिया ने बताया कि पुलिस को बाद में पता चला कि बच्चे को पानी की टंकी में फेंकने वाली मां ही थी। उन्होंने बताया कि उसे सोमवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। करिश्मा गर्भवती होने के बाद से ही इमोशनल और शारीरिक रूप से परेशान रहती थी, हमेशा कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत करती थी और अपने परिवार के सदस्यों को बताती थी कि वह परेशान है क्योंकि उसका बच्चा बहुत रोता है।

आरोपी ने विरोधाभासी बयान दिए, जिससे संदेह पैदा हुआ। उसने दावा किया कि उसने अपने बेटे को एक कमरे में रखा और बाथरूम चली गई, और वापस लौटने पर उसे गायब पाया। अधिकारी ने बताया कि भूमिगत पानी की टंकी में बच्चे के पाए जाने के बाद पुलिस ने इस संदेह पर जांच शुरू की कि किसी ने उसे वहां फेंक दिया है, क्योंकि टंकी की संरचना के कारण यह लगभग असंभव है कि बच्चा दुर्घटनावश वहां पहुंचा हो।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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