क्राइम

बिना दस्तावेज 17 लोन पास किए, बैंक को 3.61 करोड़ का चूना, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व मैनेजर को 7 साल की जेल

Bank Of Maharashtra Fraud Case:जयपुर CBI कोर्ट ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व ब्रांच मैनेजर राम भरोसे मीना को 3.61 करोड़ के लोन फ्रॉड में 7 साल की जेल और 2.60 लाख जुर्माने की सजा सुनाई है, यह 17 फर्जी लोन का मामला है।

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प्रतीकात्मक फोटो

Bank Of Maharashtra Fraud Case: जयपुर में 3.61 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में सीबीआई कोर्ट ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व ब्रांच मैनेजर को 7 साल की सख्त सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी पर 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में एक अन्य निजी व्यक्ति को भी 3 साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

सीबीआई के मुताबिक, जयपुर की सीबीआई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की गोपालपुरा बाईपास शाखा के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राम भरोस मीणा को दोषी ठहराया। उन्हें 7 साल की Rigorous Imprisonment (RI) यानी सश्रम कारावास की सजा दी गई। वहीं, मामले में शामिल निजी व्यक्ति माखन लाल मीणा को कोर्ट ने 3 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

17 खातों में नियमों को ताक पर रखकर लोन

सीबीआई की जांच के मुताबिक, यह मामला साल 2015 का है। आरोप था कि तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राम भरोस मीणा ने 15 जनवरी 2015 से 6 मई 2015 के बीच 17 खातों में नियमों को दरकिनार कर लोन मंजूर किए।इन लोन को मंजूर करते समय वैध लोन आवेदन, जरूरी दस्तावेज और पर्याप्त सिक्योरिटी मौजूद नहीं थी। सीबीआई का आरोप था कि ब्रांच मैनेजर ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए धोखाधड़ी और जालसाजी की। इस पूरे फर्जीवाड़े की वजह से बैंक को करीब 3.61 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

बैंक की शिकायत पर CBI ने दर्ज किया केस

बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जयपुर स्थित जोनल ऑफिस ने इस मामले में 3 जून 2016 को लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद सीबीआई ने 9 नवंबर 2016 को केस दर्ज कर जांच शुरू की।जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 9 जुलाई 2020 को दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने 1 दिसंबर 2021 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। लंबी सुनवाई और ट्रायल के बाद कोर्ट ने दोनों को दोषी माना और अब उन्हें सजा सुना दी गई है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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