शहर

महिला वोट की नई ताकत; आर्थिक मदद और रोजगार योजनाओं ने बदला बिहार–बंगाल का राजनीतिक माहौल

बिहार विधानसभा चुनाव में नकद सहायता योजनाओं ने महिला वोट को निर्णायक भूमिका में ला खड़ा किया था। अब वही ट्रेंड पश्चिम बंगाल में भी साफ नजर आने लगा है। फर्क सिर्फ इतना है कि बंगाल में यह वोट पहले से ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में मजबूती से खड़ा है, जो बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

Image

महिला वोट बना निर्णायक हथियार! (सांकेतिक फोटो)

West Bengal News: बिहार चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत महिलाओं को ₹10,000 की सीधी आर्थिक मदद ने जातिगत गणित को कमजोर किया। पहली बार महिलाओं ने अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए मतदान किया और महिला वोट सत्ता संतुलन को प्रभावित करने वाली ताकत बन गया। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना महिलाओं के लिए नियमित आय का सहारा बन चुकी है। एससी–एसटी वर्ग की महिलाओं को ₹1,200 और अन्य महिलाओं को ₹1,000 सीधे खाते में मिलने से इस योजना का असर मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ की महिला सहायता योजनाओं की तरह गहरा और स्थायी माना जा रहा है।

बंगाल की बेटी बनाम बाहरी राजनीति

बंगाल की सामाजिक और राजनीतिक संरचना में महिला नेतृत्व और मातृशक्ति की स्वीकार्यता ने तृणमूल कांग्रेस के महिला-केंद्रित नैरेटिव को और मजबूत किया है। यही कारण है कि बीजेपी को यहां महिला वोट के मोर्चे पर हमेशा अतिरिक्त संघर्ष करना पड़ा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने मुकाबले को “बंगाल की बेटी बनाम बाहरी राजनीति” के रूप में पेश किया। नतीजा यह रहा कि तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, जबकि बीजेपी 77 सीटों तक सीमित रह गई।

महिला वोट अब भी ममता बनर्जी के साथ

बीजेपी ने सोनार बंगला संकल्प पत्र में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण, मुफ्त शिक्षा, महिला पुलिस बटालियन और पेंशन जैसे बड़े वादे किए, लेकिन जमीन पर लागू योजनाओं के सामने ये घोषणाएं प्रभावी साबित नहीं हो सकीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की 42 में से 29 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की जीत ने यह साफ कर दिया कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में महिला वोट अब भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।

2026 से पहले बीजेपी का महिला मंथन

2026 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी नकद सहायता, रोजगार, सुरक्षा, शिक्षा और पेंशन को जोड़कर एक संयुक्त महिला पैकेज पर काम कर रही है। दिल्ली में संगठन महामंत्री बीएल संतोष के साथ महिला मोर्चा की बैठक इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक तृणमूल सरकार लक्ष्मी भंडार की राशि बढ़ाने या महिलाओं को एकमुश्त सहायता देने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। ऐसे में बीजेपी के लिए टीएमसी के महिला वोट बैंक में सेंध लगाना और मुश्किल हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 में बंगाल की महिलाएं सिर्फ योजनाओं को नहीं, बल्कि भरोसे, निरंतरता और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखकर मतदान करेंगी और यही फैसला बंगाल की सत्ता की दिशा तय करेगा।

Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारीauthor

हिमांशु तिवारी एक पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का 16 साल का अनुभव है। मैंने अपना करियर क्राइम रिपोर्टर के रूप में शुरू किया था लेकिन बाद में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में शिफ्ट हो गया। पिछले 12 से अधिक वर्षों से बीजेपी, आरएसएस को कवर कर रहे हैं, कुछ आम चुनावों और कई विधानसभा चुनावों की सटीक रिपोर्टिंग भी की है। "सारी दुनिया एक मंच है" और इसलिए रंगमंच और नाटक लिखने में गहरी रुचि है।

और पढ़ें
End of Article