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Monsoon ले चुका है विदाई, फिर क्यों पंजाब से लेकर हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली तक हो रही है बारिश?

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड से मानसून की विदाई हो चुकी है, इसके बावजूद इन राज्यों में बारिश जारी है। आखिर वह कौन से कारक हैं, जिनके कारण मानसून लौटने के बावजूद यहां बारिश हो रही है? चलिए जानते हैं -

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मानसून लौटने के बाद बारिश क्यों?

उत्तर और उत्तर पश्चिमी भारत के हिस्सों से Monsoon विदाई ले चुका है। लेकिन इसके बावजूद रविवार रात से सोमवार सुबह तक दिल्ली-एनसीआर में खूब बारिश हुई। यही नहीं पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। इन राज्यों में बारिश और गरज-चमक का दौर जारी है। ऐसे में प्रश्न उठ रहे हैं कि जब मानसून लौट चुका है तो फिर यहां बादल इतने मेरहबान क्यों हैं? इतनी बारिश क्यों हो रही है? वैसे बता दें कि मानसून के लौटने के बाद हो रही इस बारिश का संबंध मानसून से नहीं है, बल्कि इसका संबंध दूसरी ही मौसम गतिविधियों से है। चलिए जानते हैं -

भारत मौसम विभाग (IMD) ने रविवार 11 अक्टूबर के मौसम बुलेटिन में उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की आशंका जताई थी। विभाग के अनुसार, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में कुछ जगहों पर भारी बारिश का अनुमान जताया गया था।

इस बीच, INSAT-3DS मौसम उपग्रह से 11 अक्टूबर की रात ली गई थर्मल इन्फ्रारेड फोटो में उत्तर भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के ऊपर बादलों के विस्तृत समूह दिखाई दिए। यह तस्वीर रात 8:30 बजे से 8:57 बजे के बीच ली गई। हालांकि, सैटेलाइट तस्वीर बादलों की मौजूदगी दिखाती है। किसी स्थान पर कितनी बारिश हुई और बारिश कितनी तेज हुई, इसकी पुष्टि के लिए बारिश के वास्तविक आंकड़ों और मौसम संबंधी रिकॉर्ड को देखना जरूरी है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस समेत तीन मौसमी प्रणालियां एक्टिव

ये बात सच है कि मानसून में सबसे ज्यादा बारिश होती है। लेकिन मानसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि देश के हर हिस्से में बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ने और वातावरण के शुष्क होने के बाद भी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस जैसी मौसमी प्रणालियां बारिश करा सकती हैं।

IMD के अनुसार, इस समय हिमाचल प्रदेश के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव है। बता दें कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ऐसे मौसमी सिस्टम हैं, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं। इनका असर उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि के रूप में दिखाई दे सकता है।

इसके अलावा, उत्तर-पश्चिमी राजस्थान से पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश तक एक ट्रफ और मध्य पाकिस्तान के ऊपर बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन से मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से तक फैली दूसरी ट्रफ भी मौसम को प्रभावित कर रही है। जब इन प्रणालियों के कारण पर्याप्त नमी और वायुमंडलीय अस्थिरता पैदा होती है, तो बादल बनते हैं और बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

कहां-कहां होगी बारिश?

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर भारत के कई राज्यों में 17 अक्टूबर तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

  • उत्तराखंड : 17 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
  • हिमाचल प्रदेश : 13 अक्टूबर तक और फिर 16 से 17 अक्टूबर के दौरान बारिश हो सकती है।
  • पंजाब : 15 अक्टूबर को कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। 12 से 14 अक्टूबर के बीच भी कुछ जगहों पर बौछारें पड़ सकती हैं।
  • हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली : आने वाले दिनों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है।
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश : कुछ इलाकों में भी बारिश हो सकती है।

बारिश का सटीक स्थान, समय और तीव्रता स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर आप किसी यात्रा पर जा रहे हैं या खेती से जुड़े कामों की योजना है तो पहले IMD का ताजा पूर्वानुमान देखना न भूलें।

IMD की चेतावनी

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि गरज-चमक और तेज हवाओं से खड़ी फसलों, पेड़ों और बिजली की लाइनों को नुकसान हो सकता है। भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ का खतरा भी पैदा हो सकता है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में संवेदनशील स्थानों पर लैंडस्लाइड की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में लोगों को सलाह दी जाती है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और खुले स्थानों पर जाने से बचें।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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