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कौन हैं श्रवण कुमार? जिन्हें JDU ने बिहार में विधायक दल का नेता चुना

बिहार में JDU ने अपने वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता चुन लिया है। वह साल 1995 से लगातार नालंदा से चुनाव जीतते रहे हैं।

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JDU ने श्रवण कुमार को बनाया विधायक दल का नेता, जानें कौन हैं वो

Who is Shravan Kumar: बिहार में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद हर किसी को इस बात का ही इंतजार था कि JDU विधायक दल का नेता कौन होगा? आखिर आज यानी मंगलवार 21 अप्रैल को इस सस्पेंस से भी पर्दा उठ गया और श्रवण कुमार को JDU विधायक दल का नेता चुना गया है। इस अवसर पर चलिए जानते हैं कौन हैं श्रवण कुमार? उनका राजनीतिक करियर कैसा रहा है? राजनीति में उनका आगमन कैसे हुआ? और नीतीश कुमार से उनके कैसे संबंध हैं?

बिहार की राजनीति में श्रवण कुमार एक ऐसा नाम है, जिसने संघर्ष, धैर्य और जनसेवा के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। बिहार की नालंदा विधानसभा सीट से लगातार जीत दर्ज करने वाले श्रवण कुमार को बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिली है, लेकिन उनकी यह सफलता एक लंबे संघर्ष का परिणाम है।

जेपी आंदोलन से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और कई अन्य नेताओं की तरह श्रवण कुमार का राजनीतिक सफर भी साल 1974 के जेपी आंदोलन से ही शुरू हुआ। जेपी आंदोलन के चलते देश के युवाओं में एक नई चेतना जगी और बड़ी संख्या में युवा राजनीति से जुड़े। इसी दौरान श्रवण कुमार को कर्पूरी ठाकुर का भी साथ मिला और उन्होंने कर्पूरी से राजनीति के गूढ़ सिद्धांत सीखे।

पहले चुनाव में श्रवण कुमार हारे या जीते?

श्रवण कुमार ने साल 1985 में अपना पहला चुनाव लड़ा। उन्होंने नालंदा विधानसभा सीट से लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें सिर्फ 2400 वोट ही मिले और पहले ही चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इस हार से श्रवण कुमार कुछ निराश तो जरूर हुए, लेकिन कर्पूरी ठाकुर की सीख ने उनके राजनीतिक करियर को दिशा दी। तब कर्पूरी ने उनसे कहा था, 'हम पार्टी टिकट चुनाव जीतने के लिए नहीं, नेता बनाने के लिए देते हैं। जिन 2400 लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में आपको वोट दिया, वे आपके हार्डकोर समर्थक हैं। एक दिन यही लोग आपको विधायक बना देंगे।' उनसे प्रेरणा लेकर श्रवण कुमार ने गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं को देखा और उनका समाधान करने लगे।

दूसरे चुनाव में श्रवण कुमार को कितने वोट मिले

साल 1990 के विधानसभा चुनाव में श्रवण कुमार को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इस बार उनके मतों की संख्या 50 हजार से अधिक रही। इस तरह उनका जनाधार लगातार मजबूत होता चला गया।

तीसरी बार में श्रवण कुमार को जीत मिली?

फिर 1995 का विधानसभा चुनाव आया और श्रवण कुमार ने एक बार फिर नालंदा से चुनाव लड़ा। इस बार उन्होंने यहां से एतिहासिक जीत दर्ज की और फिर इस सीट पर हमेशा का लिए अपना वर्चस्व कायम कर लिया। 1995 से 2025 तक उन्होंने नालंदा से फिर कभी हार का मुंह नहीं देखा। साल 2025 के पिछले चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को 33 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर जीत दर्ज की।

नीतीश कुमार के साथ बनाई नई पार्टी

साल 1994 में जब नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस ने समता पार्टी बनाई तो श्रवण कुमार भी उनके साथ थे। इसके बाद वह लगातार नीतीश कुमार के विश्वसनीय सहयोगी बने रहे। बाद में वह नीतीश के साथ JDU का हिस्सा बने और 2005 में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो बिहार सरकार में श्रवण कुमार को मुख्य सचेतक बनाया गया।

बिहार मंत्रीमंडल में कब शामिल हुए श्रवण कुमार

श्रवण कुमार अपनी सीट से लगातार जीत दर्ज कर रहे थे। बिहार में 2005 से लगातार उनकी पार्टी की सरकार भी थी। लेकिन 2005 से 2014 तक उन्हें बिहार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। बताया जाता है कि इस दौरान वह पार्टी से नाराज भी हुए। हालांकि, बाद में उन्हें ग्रामीण कार्य, ग्रामीण विकास और संसदीय कार्य जैसे कुछ महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई। श्रवण कुमार के कार्यकाल में ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर सड़क और पुल बनाने का काम किया गया।

किसान परिवार से रखते हैं ताल्लुख

श्रवण कुमार एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुख रखते हैं। आज भी वह अपनी सादगी और जमीन से जुड़े स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। वह आज भी लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनका समाधान निकालने की भी कोशिश करते हैं।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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