शहर

हरियाणा का ये एतिहासिक शहर कहलाता है ‘चावल का कटोरा’, महाभारत से भी है नाता

भारत के 28 राज्यों में शामिल हरियाणा अपनी समृद्ध संस्कृति और कृषि प्रधान पहचान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। खाद्यान्न उत्पादन और बासमती चावल के निर्यात में इसका योगदान देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कृषि समृद्धि के कारण हरियाणा का एक शहर ‘चावल का कटोरा’ कहलाता है, जिसके बारे में आज हम जानेंगे।

Rice Bowl of Haryana

हरियाणा में चावल का कटोरा वाला शहर

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Rice Bowl of Haryana: भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिनमें से एक प्रमुख राज्य हरियाणा है। यह राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट खान-पान के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसके साथ ही हरियाणा कृषि क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में इसका योगदान 5 प्रतिशत से अधिक है, जबकि बासमती चावल के निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से भी अधिक है। इसके अलावा, भारत के कुल गेहूं उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत और चावल उत्पादन में करीब 4.33 प्रतिशत योगदान हरियाणा का है। ऐसे में आज हम आपको हरियाणा के उस शहर के बारे में बताएंगे जिसे चावल का कटोरा कहा जाता है।

Rice Production in Haryana

हरियाणा में चावल का उत्पादन

हरियाणा राज्य का गठन

हरियाणा राज्य का गठन 1 नवंबर 1966 को किया गया। इससे पहले यह पंजाब राज्य का हिस्सा था, लेकिन भाषा और सांस्कृतिक भिन्नताओं के कारण अलग राज्य की मांग उठी, जिसके परिणामस्वरूप हरियाणा को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित किया गया। लगभग 44,212 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हरियाणा देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 1.5 प्रतिशत भाग है। राज्य पुनर्गठन के बाद यह भारत का 17वां राज्य बना। वर्तमान में हरियाणा में 22 जिले हैं, जो 6 मंडलों के अंतर्गत आते हैं। इन मंडलों के भीतर कुल 73 उपमंडल शामिल हैं।

चावल का कटोरा

अगर यह पूछा जाए कि हरियाणा के किस शहर को ‘चावल का कटोरा’ कहा जाता है, तो इसका जवाब करनाल है। करनाल अपने समृद्ध धान उत्पादन, विशाल चावल मंडियों और कृषि केंद्र के रूप में खास पहचान रखता है। यह जिला विशेष रूप से लंबे और सुगंधित बासमती चावल के लिए प्रसिद्ध है। यहां उत्पादित चावल की गुणवत्ता इतनी उत्कृष्ट होती है कि इसका निर्यात खाड़ी देशों सहित कई विदेशी बाजारों में किया जाता है। उच्च गुणवत्ता और प्रीमियम श्रेणी के चावल के कारण करनाल को अलग और विशिष्ट पहचान प्राप्त हुई है।

CSSRI in Karnal

करनाल में CSSRI

CSSRI भी है मौजूद

करनाल में केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) स्थित है, जहां मिट्टी की गुणवत्ता और लवणता पर व्यापक अनुसंधान किया जाता है। इस संस्थान के प्रयासों से जिले की खारी भूमि को सुधारकर उसे खेती योग्य बनाया गया है, जिससे यहां उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल की खेती संभव हो सकी है। यमुना नदी के किनारे स्थित करनाल की जलोढ़ मिट्टी धान की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। उपजाऊ भूमि और अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण यहां धान की पैदावार अच्छी होती है, जिससे चावल की गुणवत्ता भी अन्य जिलों की तुलना में बेहतर मानी जाती है।

महाभारत काल से जुड़ाव

मान्यता है कि करनाल नगर की स्थापना महाभारत काल के महान योद्धा कर्ण से जुड़ी हुई है। कर्ण को महाभारत के प्रमुख और पराक्रमी पात्रों में गिना जाता है। वे कुंती और सूर्यदेव के पुत्र थे, लेकिन सामाजिक परिस्थितियों के कारण कुंती ने जन्म के बाद उनका त्याग कर दिया। बाद में उनका पालन-पोषण अधिरथ और राधा नामक सारथी दंपत्ति ने किया, इसलिए उन्हें ‘सूतपुत्र’ और ‘राधेय’ के नाम से भी जाना गया। कर्ण अपनी उदारता और दानशीलता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे। दुर्योधन के प्रति उनकी निष्ठा अटूट थी, जिसके कारण उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से भाग लिया। अंततः युद्ध में उनका सामना अर्जुन से हुआ और वे वीरगति को प्राप्त हुए। करनाल की भौगोलिक स्थिति भी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह शहर कुरुक्षेत्र से लगभग 35.9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Cities News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।

 Nilesh Dwivedi
Nilesh Dwivedi author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

End of Article