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Guwahati Old Name: गुवाहाटी का पुराना नाम क्या था? जानें कैसे पड़ा वर्तमान नाम, देवी कामाख्या से जुड़ा है शहर का इतिहास

Guwahati Old Name: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है और इसके साथ ही आज हम आपको मां कामाख्या की भूमि के नाम से जानें जाने वाले गुवाहाटी के इतिहास और उसके पुराने नाम के बारे में बताएगें।

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गुवाहाटी का पुराना नाम क्या था (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत)

Guwahati Old Name: गुवाहाटी असम सबसे का बड़ा शहर है। इतना ही नहीं गुवाहाटी को मां कामाख्या की भूमि के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर को प्राचीन मंदिरों, पारंपरिक त्योहारों, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है। गुवाहाटी का इतिहास करीब 2000 साल पुराना है। बीते सालों में इस शहर का विकास तेजी से हो रहा है। मां कामाख्या की भूमि होने के कारण यहां हर साल हजारों-लाखों लोग माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि (Navratri 2025) की शुरुआत के साथ ही यहां भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचेंगे। इसके अलावा यहां घूमने के लिए कई अन्य स्थान मौजूद हैं। गुवाहाटी की यात्रा के दौरान या इस शहर का वर्तमान नाम सुनते हुए आपने कभी सोचा की शहर का पुराना नाम क्या था? इस शहर का वर्तमान नाम कैसे पड़ा? और इसका इतिहास क्या है? आइए आज आपको इन सभी सवालों के जवाब दें।

कैसे मिला गुवाहाटी को उसका वर्तमान नाम?

गुवाहाटी को उसका वर्तमान नाम असमिया भाषा के दो शब्दों को मिलाकर मिला है। गुवा जिसका अर्थ सुपारी है और हाट जिसका अर्थ बाजार है। इन दोनों शब्दों को मिलाकर इसे गुवाहाटी कहा गया। लेकिन 1826 में ब्रिटिश के आधिपत्य के बाद अंग्रेज अपनी सुविधा के लिए इसे गौहाटी कहने और लिखने लगे, जिसके कारण इसे गौहाटी के नाम से जाना गया। अब सवाल ये है कि गौहाटी वापस गुवाहाटी कैसे बना। बता दें कि जब देश के शहरों को उनका पुराना नाम लौटाने की शुरुआत हुई, तो शहर को वापस गुवाहाटी के नाम से जाना गया।

Guwahati Old Name

गुवाहाटी का पुराना नाम क्या था (फोटो - Wikipedia)

गुवाहाटी की पुराना नाम क्या है?

इतिहास में पीछे जाएं तो पता लगता है कि गुवाहाटी शहर का एक नहीं बल्कि दो प्राचीन नाम है। जी हां, आपने सही सुना, जैसे अन्य राज्यों और शहरों की स्थापना और उनके नाम के पीछे एक इतिहास है, वैसे ही गुवाहाटी के पीछे भी एक गहरा इतिहास है, जिसमें इस शहर को गुवाहाटी या गौहाटी नहीं बल्कि किसी और नाम से जाना जाता था। प्राचीन काल में गुवाहाटी को प्राग्ज्योतिषपुर के नाम से जाना जाता था। इसका अर्थ 'पूर्व का प्रकाश' है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस शहर को 'कामरूप' के नाम से जाना जाता था। कथाओं के अनुसार, यह वही स्थान है, जहां कामदेव का जन्म हुआ था। कुछ लोगों का मानना है कि कामरूप नाम का संबंध देवी कामाख्या और कामदेव से है। इसको लेकर कई कहानियां है। वहीं दूसरी तरफ प्राग्ज्योतिषपुर नाम के पीछे कारण यह दिया जाता है कि यह वही स्थान है जहां भारतीय ज्योतिष शास्त्र का विकास हुआ था।

गुवाहाटी के प्राचीन नाम को लेकर दो अलग मत भी है। इतिहासकारों के एक वर्ग के अनुसार, प्राग्ज्योतिषपुर का नाम कामरूप से भी पुराना है। वहीं इतिहासकारों के दूसरे वर्ग का कहना है कि प्राग्ज्योतिषपुर कामरूप की राजधानी था। प्राग्ज्योतिषपुर शहर का नाम रामायण, महाभारत और अन्य कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। वहीं कालिका पुराण और जोगिनी तंत्र में कामरूप का उल्लेख मिलता है।

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गुवाहाटी का पुराना नाम क्या था (Photo - Canva)

गुवाहाटी का इतिहास

गुवाहाटी शहर असम का सबसे बड़ा और सबसे प्रमुख शहर है। अपनी भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी के कारण इसे अक्सर "पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार" कहा जाता है, क्योंकि यह पूर्वोत्तर राज्यों में जाने वाले यात्रियों के लिए एक मुख्य प्रवेश बिंदु है। गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है। गुवाहाटी में ही देवी कामाख्या का शक्तिपीठ है, जिसके दर्शन के लिए हजारों-लाखों लोग यहां आते हैं। इसको लेकर एक पौराणिक कथा भी है जिसके बारे में अधिकतर लोग जानते हैं। ये कथा भगवान शिव और माता सती से जुड़ी हुई है।

कथा के अनुसार, सती शक्तिशाली राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री थी और उन्होंने भगवान शिव से विवाह किया था। दक्ष द्वारा एक महायज्ञ आयोजित किया गया था, जिसमें माता सती और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। इस महायज्ञ की जानकारी मिलते ही सती ने वहां जाने की इच्छा जताई, लेकिन बिना आमंत्रण भगवान शिव ने उन्हें वहां जाने से मना किया। लेकिन क्योंकि वह राजा की पुत्री थी उन्होंने फिर जाने की बात की तो वह उन्हें रोक नहीं पाए। सती पुत्री के तौर पर महायज्ञ में गई। लेकिन पिता की तरफ से पति के लिए की गई अपमानजनक टिप्पणियां वह सह नहीं पाई और क्रोधित होकर उन्होंने हवन कुंड में अपने प्राण त्याग दिए। जिसके बाद शिव वहां पहुंच और सती के मृत शरीर को लेकर संसार में भ्रमण करने लगे। तभी भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर के 51 टुकड़े किए, जो अलग-अलग स्थान पर गिरे और आज शक्तिपीठ के नाम से जाने जाते हैं। माता सती के अंग का एक हिस्सा 'योनी' गुवाहाटी के नीलांचल पर्वत पर गिरा, जिसे आज कामाख्या देवी के रूप में पूजा जाता है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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