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West Bengal Election: चुनाव ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों के नाम ही SIR में कटे, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने आज चुनाव ड्यूटी अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी। चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों का कहना है कि उनका ही नाम SIR में काट दिया गया है, सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट अथॉरिटी में जाने को कहा है।

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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के चुनाव अधिकारियों की याचिका खारिज की

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच वोटर लिस्ट को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। इसका मतलब ये है कि वह चुनाव ड्यूटी तो करेंगे, लेकिन उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि इस तरह के मामलों को लेकर अपीलीय प्राधिकरण (Appellate Tribunal) में जाना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'हम हर दिन अपने आदेश नहीं बदल सकते।' वहीं, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि वह इस साल वोट दे पाएंगे या नहीं, इससे ज्यादा मतदाता सूची में नाम बने रहने का अधिकार अधिक महत्वपूर्ण है और इस पहलू की जांच की जाएगी।

SIR में हटाए गए 27 लाख नाम

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में वर्तमान में मतदाताओं की कुल संख्या 7.04 करोड़ है, जबकि SIR प्रक्रिया से पहले 7.66 करोड़ थी। SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 61 लाख नामों में बदलाव हुआ है, जबकि लगभग 27 लाख नाम हटाए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस फिर तेज हो गई है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान कल यानी गुरुवार 23 अप्रैल को छिटपुट घटनाओं के साथ अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो चुका है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 294 में से 152 सीटों पर हुए मतदान में 91.78 फीसद की प्रभावशाली भागीदारी दर्ज की गई। मतदान का यह आंकड़ा दर्शाता है कि मतदाताओं में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उत्साह बना हुआ है।

पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने किया मतदान

पहले चरण के मतदान की खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं ने इस बार पुरुषों से ज्यादा भागीदारी दिखाई। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 92.69 रहा, जबकि पुरुषों का 90.92 फीसद दर्ज किया गया। इसके अलावा, ट्रांसजेंडर मतदाताओं की भागीदारी भी 56.79 प्रतिशत रही, जो सामाजिक समावेशिता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हुए इस पहले चरण के मतदान ने चुनावी माहौल को और सक्रिय बना दिया है। अब पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जबकि 4 मई को मतगणना की जाएगी। ऐसे में वोटर लिस्ट विवाद और उच्च मतदान प्रतिशत के बीच पश्चिम बंगाल का चुनावी परिदृश्य और भी दिलचस्प हो गया है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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