Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी को विभिन्न नामों से जाना जाता है। इसे कोई काशी कहता तो कोई बनारस, विश्वनाथ की नगरी और धर्मनगरी कहता है। इस ऐतिहासिक शहर की पहचान गंगा और गंगा घाटों से होती है। गंगा घाटों की खूबसूरती देखने के लिए सिर्फ देश ही नहीं दुनिया के अलग-अलग कोने से लोग यहां पहुंचते हैं। वाराणसी में होने वाली सांध्य आरती लोगों का मन मोह लेती है। वैसे तो वाराणसी के दस से अधिक घाटों पर गंगा की भव्य आरती होती है लेकिन अब शहर के सबसे खूबसूरत नमो घाट पर भी गंगा आरती की शुरुआत की गई। नमो घाट पर गंगा आरती की शुरुआत बुधवार, 17 सितंबर से की गई।
मंत्रोच्चार के साथ हुई आरती की शुरुआत
पीएम मोदी के 75वें जन्मदिवस (17 सितंबर 2025) के मौके पर नमो घाट का नजारा अलग था। सूरज की ढलती किरणों के साथ ही मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देने लगी। आसमान में उठती लौ सनातन का उद्घोष कर रही थी। इसके साथ ही नमो घाट पर गंगा आरती की शुरुआत हुई। पूर्व मंत्री और शहर दक्षिणी वाराणसी के विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर गंगा आरती की शुरुआत की। आरती के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
प्रतिदिन हजारों पर्यटक आते हैं नमो घाट पर
वाराणसी शहर के उत्तरी छोर पर बने नमो घाट की गिनती बनारस के सबसे खूबसूरत घाटों में होती है। नमो घाट को पीएम नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। दो चरणों में बने नमो घाट पर प्रतिदिन लगभग बीस हजार सैलानी और श्रद्धालु आते हैं। नमो घाट पर सूर्य को समर्पित हाथ की आकृतियां अलग आभा बिखेरती हैं। इस घाट पर गंगा आरती शुरू करने के लिए लंबे समय से मांग उठ रही थी। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर लोगों की इस मांग को पूरा करते हुए नमो घाट पर गंगा आरती की शुरुआत हुई।
