वाराणसी: वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित मर्दाना इमामबाड़ा को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर निगम का आरोप है कि जिस जमीन पर इमामबाड़ा बना है, वो अवैध है। नगर निगम की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करके इमामबाड़ा बनाया गया है। इमामबाड़े को खाली करने के लिए नगर निगम ने दो दिनों की मोहलत दी है। तय समय में अगर इमामबाड़े से जुड़े लोगों ने जमीन के कागजात नहीं दिखाए तो कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम की जमीन पर कब्जा करने का आरोप
नगर निगम की ओर से शहर में इन दिनों वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी की जांच की जा रही है। राजस्व और अल्पसंख्यक विभाग के कर्मचारियों को एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट सौंपनी है। इसी क्रम में पिछले दिनों राजस्व विभाग और नगर निगम की टीम दुर्गाकुंड क्षेत्र में मर्दाना इमामबाड़े की जांच करने पहुंची तो मुस्लिम पक्ष भड़क उठा। मुस्लिम पक्ष ने जांच टीम का विरोध किया। विरोध को देखते हुए जांच टीम को बैरंग लौटना पड़ा। इसके बाद नगर निगम की ओर से इमामबाड़े के मुतवल्ली को दो दिन की मोहलत देते हुए जमीन के कागज सौंपने का आदेश दिया।
वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज है इमामबाड़ा
इमामबाड़ा के मुतवल्ली मिर्जा नवाब प्यारेलाल का कहना है कि इमामबाड़ा वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है। इमामबाड़ा सैकड़ों साल पुराना है। जमीन से जुड़े सभी कागजात उनके पास है। समय मिलने पर वो कागज दिखाएंगे। दूसरी ओर हिन्दू पक्ष से जुड़े लोगों का आरोप है कि मर्दाना इमामबाड़े का निर्माण साल 1990 के बाद किया गया। जबकि मूल इमामबाड़ा वहां से कुछ दूरी पर है।
मुस्लिम पक्ष ने नगर निगम की जमीन पर अतिक्रमण करके वहां निर्माण किया गया है। टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत के दौरान लोगों ने कहा कि जिस जगह पर मर्दाना इमामबाड़ा बना है, उसके अंदर एक कुआं है। उस कुएं के पास श्रद्धालु आते थे और मुंडन संस्कार होता था। लेकिन तत्कालीन सरकारों की सरपरस्ती में वहां कब्जा करके निर्माण कर दिया गया।
