भारत को विविधताओं का देश ऐसे ही नहीं कहा जाता है, यहां की संस्कृति, भाषा, रहन-सहन, खान-पान सब अलग-अलग हैं। यहां आपको सभी धर्मों का मेल देखने को मिलेगा। वाराणसी में हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, जैन और बौद्ध सभी धर्मों के लोग हैं। भारत में इन सभी धर्मों के पवित्र जगहें भी हैं। ऐसा ही है यहां का एक शहर, जो अकेला ही तीन धर्मों की राजधानी है। आइए जानते हैं इस शहर की खासियत।
गंगा किनारे बसे वाराणसी का अपना अलग ही महत्व है। इस शहर को धर्म नगरी भी कहते हैं। यह जगह अपनी मंदिर, मठ और घाटों, हरीयाली और सुकून के लिए जाना जाता है।
सबसे प्राचीन शहर
वाराणसी की अपनी अलग ही पहचान है। इस पवित्र शहर को धर्मग्रथों के अनुसार सबसे प्राचीन और अद्भुत बताया जाता है। यह हिंदुओं के साथ ही बौद्ध धर्म के लिए भी जाना जाता है। यहीं बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त होने के बाद अपने शिष्यों को एक पेड़ के नीचे बैठकर उपदेश दिया था।
काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी में ही भगवान महादेव का प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर है। इस जगह से भक्तों की अटूट आस्था जुड़ी है। पूरे साल यहां लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस मंदिर को स्वर्ण मंदिर भी कहते हैं। मंदिर को लेकर लोगों का यह मानना है कि यहां आए भक्तों की हर मुराद पूरी होती है।
घाटों का शहर
बनारस में कई घाट हैं। इन घाटों का अपना इतिहास है। गंगा किनारे बने इन सुंदर घाटों की वजह से इसे घाटों का शहर भी कहते हैं। यहां अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट, ललिता घाट जैसे कई और भी अद्भुद घाट हैं। यहां की मणिकर्णिका घाट पर हमेशा किसी न किसी की चिता जलती रहती है।
जैन मंदिर
वाराणसी में जैन मंदिर भी है, जिसे जैन धर्म के तीर्थंकर सुप्रश्वनाथ के लिए बनाया गया था। इस मंदिर में श्वेतांबर संप्रदाय के लोगों द्वारा पूजा की जाती है।
सारनाथ मंदिर
वाराणसी में सारनाथ मंदिर भी है, जो बौद्ध धर्म के लोगों का तीर्थ स्थल है। सारनाथ में ही महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद पहली बार उपदेश दिया था। यहां कई सारे स्तुपों का निर्माण किया गया है। इन स्तूपों पर आकर इस धर्म के बारे में जाना जा सकता है।
