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यूपी के मुजफ्फरनगर में लावारिस कार में मिली युवती की लाश, प्रेम प्रसंग में की गई हत्या

Muzaffarnagar Crime: हिमांशी के पति विनीत का आरोप है कि मृतक हिमांशी के मामा और उसके बच्चों ने हिमांशी की सारी प्रॉपर्टी बिक़वाकर उसके पैसे और ज्वेलरी हड़प ली थी। जिसको लेकर हिमांशी और उसके मामा के परिवार में विवाद भी हुआ था।

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मुजफ्फरनगर में कार में मिली युवती की लाश।

Photo : Times Now Digital

Muzaffarnagar Crime: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई। जब एक गांव के बाहर खड़ी लावारिस कार में एक युवती की खून से लथपथ लाश मिली थी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल की बारीकी से जांच पड़ताल कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है। बताया जा रहा है की युवती की गोली मारकर हत्या कर शव को कार में ठिकाने लगाया गया था।

जानकारी के मुताबिक, खतौली कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि गांव रसूलपुर में एक 28 वर्षीय युवती हिमांशी की उसके मामा भरतवीर के परिजनों ने गोली मारकर हत्या कर शव को कार में डालकर गांव के बाहर छोड़ दिया है। घटना की सूचना पर एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत पुलिस फोर्स के साथ फॉरेंसिक टीम को लेकर मौके पर पहुंचे, जहां टीम ने चप्पे चप्पे की बारीकी से जांच पड़ताल कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।

परिवार में इकलौती थी हिमांशी

बताया जा रहा है हिमांशी अपने परिवार में एकलौती थी और कुछ समय पहले हिमांशी के पिता की मृत्यु भी हो गई थी। जिसके बाद हिमांशी ने विनीत नाम के एक युवक से कोर्ट मैरिज कर ली थी। बताया जा रहा है कि हिमांशी और विनीत की कोर्ट मैरिज के बाद उनके परिवार वाले उनकी शादी को लेकर राजी हो गए थे और 12 नवंबर को उनकी शादी होनी थी।

मामा से प्रॉपर्टी को लेकर हुआ था विवाद

जानकारी के मुताबिक हिमांशी अपने मामा भारतवीर के यहां रहती थी। हिमांशी के पति विनीत का आरोप है कि मृतक हिमांशी के मामा और उसके बच्चों ने हिमांशी की सारी प्रॉपर्टी बिक़वाकर उसके पैसे और ज्वेलरी हड़प ली थी। जिसको लेकर हिमांशी और उसके मामा के परिवार में विवाद भी हुआ था। विनीत का आरोप है कि इसी के चलते हिमांशी की हत्या की गई है। आलाधिकारियों की माने तो मृतक हिमांशी के मामा का परिवार मौके से फरार है जिनकी तलाश कर इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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