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UP Cabinet Meeting: जलालाबाद तहसील का नाम होगा परशुराम पुरी, मुरादाबाद-गोरखपुर में 100 बेड के अस्पतालों को मंजूरी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने आज 27 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। जलालाबाद तहसील का नाम बदलने के साथ ही मुरादाबाद और गोरखपुर में 100-100 बेड के अस्पताल बनाने की मंजूरी भी दी गई है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने 27 प्रस्ताव किए मंजूर

UP Cabinet Meeting: उत्तर प्रदेश की CM Yogi Adityanath सरकार की आज यानी सोमवार 6 जुलाई को कैबिनेट बैठक हुई। इस बैठक में शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील का नाम बदलकर भगवान परशुराम पुरी करने सहित कुल 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मंत्रियों ने प्रेस वार्ता में विभिन्न विभागों से जुड़े अहम फैसलों की जानकारी दी।

कैबिनेट बैठक में निवेश को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026, डेटा सेंटर नीति-2026 और स्टार्टअप मिशन की स्थापना जैसे बड़े निर्णय शामिल हैं। साथ ही पशुपालकों के लिए नई बीमा योजना और श्रमिकों के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने से जुड़े प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली।

शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील का नाम बदलने की मंजूरी मिलने के बाद अब संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। केंद्र सरकार के गृह विभाग से पिछले साल ही इस नाम परिवर्तन को लेकर मंजूरी मिल चुकी है। इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने नगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप उसका नाम परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से शाहजहांपुर के नगर जलालाबाद को 'परशुरामपुरी' के रूप में नई आधिकारिक पहचान प्राप्त होगी। अधिसूचना जारी होने के बाद नाम परिवर्तन का निर्णय प्रभावी हो जाएगा।

भगवान परशुराम की जन्मस्थली

जिला शाहजहांपुर स्थित नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के अंतर्गत कस्बा जलालाबाद भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथाओं एवं विभिन्न ग्रंथों में भी इस स्थान का प्रमुखता से उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से नगर का नाम भगवान परशुराम के नाम पर 'परशुरामपुरी' किए जाने की मांग की जा रही थी।

गोरखपुर-मुरादाबाद में बनेंगे अस्पताल

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड के अस्पताल तथा वाराणसी में ESIC मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत गोरखपुर और मुरादाबाद में 5-5 एकड़ तथा वाराणसी में 13 एकड़ भूमि भारत सरकार को आवंटित की जाएगी।

50 फीसद सीटें श्रमिकों के बच्चों के लिए रिजर्व

प्रस्ताव के अनुसार वाराणसी स्थित मेडिकल कॉलेज में 50 प्रतिशत MBBS सीटें श्रमिकों के बच्चों के लिए रिजर्व रहेंगी, जबकि बाकी सीटों का आवंटन राज्य और केंद्र सरकार के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से निवेश, रोजगार, पशुपालन और श्रमिक कल्याण के क्षेत्रों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का केंद्र बनेगा यूपी

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि राज्य में निवेश और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन की स्थापना को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 तथा उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। सरकार का उद्देश्य राज्य को तकनीकी निवेश और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र बनाना है।

पशुधन बीमा योजना को मंजूरी

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना राज्य के सभी 75 जिलों में लागू होगी। इसके तहत लघु एवं सीमांत किसान, पशुपालक और डेयरी संचालक अपने पशुओं का बीमा करा सकेंगे। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। योजना में 85 फीसद प्रीमियम राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को देनी होगी। इसका उद्देश्य महामारी, दुर्घटना, अपंगता या पशु की मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक अहम साधन है। अगर किसी वजह से पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंजूरी दी है।

किन परिस्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ

योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों और अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के जरिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पशु की स्थायी विकलांगता पर 75 फीसद तक भुगतान

राज्य सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। अगर कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 फीसद तक भुगतान करेगी। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

2.28 लाख से ज्यादा पशुओं का होगा बीमा

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस बजट के जरिए राज्य में कुल 2 लाख, 28 हजार, 350 पशुओं का इंश्योरेंस कराया जाएगा। इनमें 1 लाख, 86 हजार, 800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41 हजार, 550 पशुओं का बीमा एससीएसपी कम्पोनेंट के अंतर्गत किया जाएगा।

धर्मपाल सिंह ने बताया कि यूपी पशुधन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है। जीडीपी के संदर्भ में पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.50 फीसद का योगदान है। राज्य में कृषि एवं संबंध क्षेत्र की कुल जीडीपी 30 फीसद से अधिक है। पशुधन का इसमें विशेष योगदान है। पशुधन के माध्यम से यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा का स्रोत भी है। योजना के तहत एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा। इस बीमा योजना से पशुपालकों को बड़ा लाभ होगा।

गोरसंरक्षण केंद्रों में 13.50 लाख गाय संरक्षित

मंत्री ने बताया कि निराश्रित पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है। राज्य में 7500 गोसंरक्षण केंद्र हैं, जिसमें लगभग 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं। इन पर प्रतिदिन 8 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज, वन विभाग की जमीन पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है।

Manish Yadav
मनीष यादवauthor

साल 2011 था जब इंद्रप्रस्थ से पत्रकारिता के सफर की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया । कुछ साल जयपुर रहा और अब ठिकाना अवध है। माइक पकड़ कर कोशिश करता हूं कि आम की आवाज खास के कानो तक पहुंचा पाऊं उम्मीद रहती है इससे हल निकलेगा ।

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