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सोना हुआ सस्ता लेकिन अभी और गिरावट संभव, Gold Silver Ratio से मिला बड़ा संकेत

सोने का रेट करीब 1 महीने के निचले स्तर के आसपास है। लेकिन, गोल्ड सिल्वर रेश्यो बता रहा है कि दाम अभी और घट सकता है। क्योकि, इस रेश्यो के हिसाब से सोना अभी महंगा बना हुआ है।

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गोल्ड सिल्वर रेश्यो में सोना महंगा

Gold Silver Ratio : सोने का भाव बुधवार 7 अक्टूबर, 2026 को 1 महीने के निचले स्तर के आसपास 1,52,520 रुपये प्रति 10 ग्राम है। कमोडिटी मार्केट में गोल्ड और सिल्वर कंसोलिडेशन के फेज में हैं। हालांकि, इसके बाद भी Gold-Silver Ratio 68 पर पहुंच गया है। यह बताता है कि तुलनात्मक रूप से गोल्ड अब भी महंगा है। एक आम निवेशक के लिए इसके दो मायने हैं। पहला यह कि गोल्ड सस्ता हो सकता है। वहीं, दूसरा यह कि आने वाले दिनो में सिल्वर गोल्ड को आउटपरफॉर्म कर सकता है।

क्या होता है गोल्ड सिल्वर रेश्यो?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Gold-Silver Ratio 68 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि 1 औंस गोल्ड खरीदने के लिए करीब 68 औंस सिल्वर की कीमत चुकानी पड़ रही है। यह रेश्यो आमतौर पर गोल्ड और सिल्वर की रिलेटिव स्ट्रेंथ (Relative Strength) को समझने के लिए इस्तेमाल होता है। यह रेश्यो बढ़ता है, तो गोल्ड को सिल्वर के मुकाबले मजबूत माना जाता है।

68 का रेश्यो क्या बता रहा है?

Gold-Silver Ratio कोई प्राइस टारगेट नहीं है। यह सिर्फ दोनों मेटल की कीमतों का अनुपात बताता है। जब रेश्यो ऊपर जाता है, तो इसका मतलब है कि गोल्ड Silver की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वहीं, यह नीचे आता है, तो सिल्वर का गोल्ड की तुलना बेहतर प्रदर्शन दिखाता है।

लेकिन, इसे दूसरे नजरिये से देखें, तो गोल्ड ने 2026 की शुरुआत में करीब $5,595 प्रति औंस का पीक बनाया था। अक्टूबर में यह करीब $4,138 के आसपास कारोबार कर रहा है। यानी पीक से लगभग 26% का करेक्शन आ चुका है। ऐसे में गोल्ड-सिल्वर रेश्यो के आधार पर सोने के दाम घटने की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

सेंट्रल बैंक अब भी बड़े खरीदार

Gold की सबसे बड़ी स्ट्रक्चरल स्ट्रेंथ यही है कि अब भी सेंट्रल बैंक बड़े खरीदार बने हुए हैं। 2026 की दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने करीब 289 टन गोल्ड खरीदा। पूरे साल की खरीद 700-900 टन के बीच रहने का अनुमान है।यह आंकड़ा 2022 से पहले के करीब 400-500 टन के औसत से काफी ज्यादा है। यही वजह है कि 26% के करेक्शन के बावजूद एक्सपर्ट गोल्ड की लॉन्गटर्म स्टोरी को खत्म नहीं मान रहे हैं।

क्या गोल्ड बेचकर सिल्वर खरीदें?

अजय केडिया का इस मामले में कहना है कि गोल्ड और सिल्वर में सपोर्टिव इन्वेस्टमेंट फ्लो, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और सीमित सप्लाई से दिवाली और साल 2026 के आखिर तक और बढ़त की संभावना दिख रही है। सोने को सेंट्रल बैंक के जमाव, ETF इनफ्लो, रिजर्व डायवर्सिफिकेशन और रुपये में संभावित गिरावट से सपोर्ट मिल रहा है। हमें उम्मीद है कि सोना ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है, जिसका मतलब है कि रेफरेंस प्राइस से लगभग 18% की बढ़त हो सकती है।

इसके साथ ही उनका कहना है कि चांदी में ज्यादा संभावना है, लेकिन वोलैटिलिटी भी काफी ज्यादा है। लगातार सप्लाई की कमी, माइन-सप्लाई में सीमित फ्लेक्सिबिलिटी और इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक गाड़ियों, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी से भविष्य की डिमांड मुख्य वजहें बनी हुई हैं। चांदी लगभग ₹3,00,000 प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है, जो लगभग 28% की बढ़त की संभावना दिखाती है।

अगर 65-66 के करीब गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 60-62 की ओर गिरता है, तो यह चांदी के लिए फायदेमंद बना रहेगा। इन्वेस्टर्स को धीरे-धीरे पोजीशन बनानी चाहिए, लेवरेज से बचना चाहिए और अलग-अलग तरह का बुलियन एलोकेशन बनाए रखना चाहिए, जिसमें ज्यादा ग्रोथ की संभावना के लिए चांदी को तुलनात्मक रूप से ज्यादा हिस्सा देना चाहिए।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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