भारत लंबे समय तक अंग्रेजों का गुलाम रहा। अंग्रेजों के समय में ही भारत में ट्रेन की शुरुआत भी हुई। देश में रेलवे नेटवर्क बनाने में अंग्रेजों का बड़ा हाथ रहा। अंग्रेजों ने न सिर्फ देश के बड़े शहरों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा, बल्कि कई हिल स्टेशनों तक भी ट्रेन पहुंचाई। साल 1947 में अंग्रेज देश का विभाजन करके चले गए। एक हिस्सा हमेशा की तरह भारत रहा और अलग हुए हिस्से का नाम पाकिस्तान पड़ा। अंग्रेजों के समय पर देश एक था, इसलिए रेलवे लाइन भा अंग्रेजों ने पूरे देश में बिछायी थीं। उस समय आज के भारत और पाकिस्तान के शहरों के बीच कई ट्रेनें चलती थीं। दो देशों के रूप में भारत और पाकिस्तान के आजाद होने के बाद कुछ ट्रेनें आज भी उसी नाम से उसी रूट पर चल रही हैं। हालांकि, बीच में बॉर्डर आने के बाद उनके गंतव्य स्टेशन को बदल दिया गया है।
आजादी के बाद बीच में सीमा रेखा खींचे जाने के कारण ट्रेनें सीमा पार नहीं करती हैं। लेकिन आज भी कुछ ऐतिहासिक ट्रेनें मौजूद हैं जो आजादी से पहले से चलती आ रही हैं। इनमें से कुछ के तो नाम भी आज तक वही हैं, जबकि कुछ के नाम जरूर बदल गए हैं, लेकिन रूट वही हैं।
आजादी से पहले ट्रेन का सफर
आजादी से पहले यात्री बड़े ही आराम से बॉम्बे (अब मुंबई) से लाहौर और पेशावर तक ट्रेन में बैठकर सफर करते थे। यह रूट 65 हजार किमी लंबे रेलवे नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसमें से 10 हजार 700 किमी हिस्सा 1947 में पाकिस्तान के हिस्से में चले गए।
आज भले ही भारत और पाकिस्तान की सीमाएं बंद हों। लेकिन आजादी से पहले दोनों हिस्सों के बीच ट्रेनों की आवाजाही खूब होती थी। आजादी के बाद भी दोनों देशों के बीच ट्रेन सेवा चलती थी। चलिए आज कुछ उन ट्रेनों के बारे में जानते हैं, जो आजादी से पहले से चल रही हैं। आज भले ही यह भारत-पाकिस्तान का बॉर्डर पार नहीं करतीं, लेकिन इतिहास को अपने में समेटे हुए हैं।
फ्रंटीयर मेल
आजादी से पहले यह ट्रेन बॉम्बे (अब मुंबई) से वडोदरा, दिल्ली, लाहौर, रावलपिंडी होते हुए पेशावर तक जाती थी। एस समय इस ट्रेन को भारतीय रेलवे की वीआईपी रेलगाड़ी माना जाता था। अपने समय पर इस ट्रेन की वैसी ही साख थी, जैसी आज के दौर में वंदे भारत की है।
अच्छी बात यह है कि यह ट्रेन आज भी चल रही है, लेकिन अब इसका नाम बदलकर गोल्डन टेम्पल मेल कर दिया गया है और अब यह मुंबई से अमृतसर के बीच ही चलती है।
पंजाब मेल
आजादी से पहले दिल्ली से अमृतसर और लाहौर होते हुए मुल्तान तक जाने वाली यह ट्रेन उस समय यात्रियों और ट्रांसपोर्ट ट्रेन के रूप में काम करती थी।
यह ट्रेन आज भी चलती है और आज भी पंजाब मेल के नाम से ही चलाई जा रही है। हालांकि यह ट्रेन अब मुंबई से पंजाब के फिरोजपुर के बीच चलती है।
कराची मेल
आजादी से पहले यह ट्रेन तत्कालीन बॉम्बे (मुंबई) से जोधपुर होते हुए सिंध प्रांत के हैदराबाद होते हुए कराची तक जाती थी। उस समय एकीकृत भारत के बड़े शहरों को जोड़ने वाली यह एक महत्वपूर्ण ट्रेन थी।
आज यह ट्रेन पाकिस्तान में बोलन मेल के नाम से चलती है। हालांकि, अब इसका रूट कराची से क्वेटा के बीच है।
