दीपावली के अवसर पर लोग बड़ी मात्रा में पटाखे जलाते हैं। इससे प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले कई वर्षों से पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इसके साथ ही ग्रीन पटाखे का विकल्प भी सामने आता है। एक बार फिर दिवाली आने वाली है और दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध के मुद्दे पर आज यानी सोमवार 12 अक्टूबर को Supreme Court में सुनवाई हुई।
पटाखों पर प्रतबंध के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि अदालत धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती, बल्कि इस मामले में व्यावहारिक और संतुलित रास्ता निकालने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों से पटाखे चलाने के समय को सीमित रखने की अपील करने के लिए अभी पर्याप्त समय है।
सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि यदि पटाखों पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया जाता है, तो लोग दिन में ही पटाखे जलाना शुरू कर सकते हैं। अदालत की टिप्पणियों से साफ हुआ कि इस मामले में सिर्फ प्रतिबंध लगाने के बजाय उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन और लोगों के सहयोग पर भी विचार किया जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 अक्टूबर को होगी।
'पटाखे चलाना धर्म का मौलिक अधिकार नहीं'
सुनवाई के दौरान एक वकील ने दलील दी कि पटाखे चलाना धर्म के मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं है। वकील ने कहा कि पूजा करना धार्मिक आस्था का हिस्सा है, लेकिन पटाखे चलाना नहीं। उन्होंने इस संदर्भ में टिप्पणी की कि भगवान भी यह देखकर हैरान होंगे।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएगी, लेकिन यह भी देखेगी कि संतुलित दृष्टिकोण क्या हो सकता है। इस तरह सुनवाई में धार्मिक आस्था, पटाखों के इस्तेमाल और प्रतिबंध के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई।
पटाखे चलाने के समय को सीमित करने पर जोर
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उन्होंने संकेत दिया कि लोगों से अपील करने और पटाखे चलाने के लिए कुछ निर्धारित घंटों की व्यवस्था पर विचार करने का अभी समय है।
दिल्ली-NCR में पटाखों का इस्तेमाल वायु प्रदूषण को लेकर हर साल अहम मुद्दा रहता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर प्रतिबंध, समय-सीमा और नियमों के पालन पर चर्चा होती रही है।
हालांकि, मौजूदा सुनवाई में अंतिम आदेश को लेकर कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। अदालत ने इस मुद्दे पर संतुलित रास्ता तलाशने की बात कही है।
नागरिकों और सिविल सोसायटी की भूमिका अहम
CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर नागरिक और सिविल सोसायटी मौजूदा स्थिति के प्रति जागरुक रहें और अपनी जिम्मेदारी समझें, तो यह अच्छा होगा। उनकी टिप्पणी से संकेत मिलता है कि वायु प्रदूषण से जुड़े इस मुद्दे पर नियमों के साथ जन-जागरुकता और नागरिकों की भागीदारी भी अहम है।
अब इस मामले में 15 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर नजर रहेगी। उस दिन अदालत पटाखों के इस्तेमाल और प्रतिबंध से जुड़े मुद्दे पर आगे विचार कर सकती है।
