Sri Ganganagar Open Jail: राजस्थान की खुली जेलों में सुधार के लिए रखे जाने वाले सजायाफ्ता कैदी किस तरह की मौज काट रहे हैं, इसकी बानगी श्रीगंगानगर में देखने को मिली। जहां आजीवन कारावास भुगत रहा दीक्षांत कामरा जिले की नरसिंहपुरा खुली जेल से निकलकर 5 दिन थाईलैंड घूम आया और जेल प्रशासन को भनक तक नहीं लगी।
विदेश में मस्ती करता रहा हत्यारा
जयपुर के बहुचर्चित दुष्यंत हत्याकांड में श्रीगंगानगर की खुली जेल में आजीवन कारावास भुगत रहा दीक्षांत कामरा 9 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2025 तक 5 दिन थाईलैंड घूम आया। इस दौरान जेल में उसकी फर्जी हाजिरी लगती रही और वह विदेश में मस्ती मारता रहा। दीक्षांत कामरा ने लेडी डॉन प्रिया सेठ के साथ 2018 में झोटवाड़ा निवासी दुष्यंत को अगवा कर उसकी हत्या की थी। दीक्षांत कामरा जिस पासपोर्ट पर थाईलैंड घूमकर आया, वह पासपोर्ट वर्ष 2016 में उसके स्थाई निवास पदमपुर श्रीगंगानगर के पते से जारी हुआ था। जेल प्रशासन की इतनी बड़ी खामी सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। वहीं जेल में चल रही अव्यवस्थाओं पर पूर्व में शिकायत करने वाले बर्खास्त सिपाही अनिल गोदारा की मानें तो इस पूरे खेल में बड़े अधिकारी-कर्मचारी मिले हुए हैं, जिनकी गहनता से जांच होनी चाहिए।
खुली जेल से करता रहा अफीम तस्करी
हत्यारा दीक्षांत नरसिंहपुरा बारानी खुली जेल के जेल प्रहरी पाबूराम से सांठगांठ कर विदेश ही नहीं घूमकर आया, बल्कि खुली जेल से ही अफीम तस्करी करता रहा। मामले का खुलासा तब हुआ जब 3 नवंबर को दीक्षांत कामरा 40 ग्राम अफीम के साथ जवाहरनगर थाना पुलिस की पकड़ में आया। जिसके बाद श्रीगंगानगर के जवाहरनगर थाने में आरोपी के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। दीक्षांत और प्रिया सेठ ने 2018 में दुष्यंत की हत्या की थी। दीक्षांत ने प्रेमिका प्रिया सेठ के साथ मिलकर साल 2018 में झोटवाड़ा निवासी दुष्यंत को अगवा कर लिया था। तीन लाख रुपए मिलने के बाद दोनों ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। फिर चाकू से चेहरा बिगाड़कर शव को अटैची में भरकर आमेर में फेंक दिया था। अदालत ने साल 2023 में आजीवन कारावास सुनाई थी, तब से आरोपी पहले जयपुर जेल में फिर श्रीगंगानगर और बीकानेर की अलग-अलग खुली जेलों में मस्ती से सजा काट रहा था। पूरे मामले का खुलासा होने के बाद अब कानून के जानकार इसे मृतक के परिवार के मानवाधिकार का हनन भी बता रहे हैं।
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5 दिन गायब रहा फिर भी नहीं हुई FIR
इस पूरे प्रकरण में जेल की सुरक्षा-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। खुली जेल में दोनों समय हाजिरी का नियम है। दीक्षांत 5 दिन गायब रहा। विदेश घूमता रहा, लेकिन अफसरों को भनक कैसे नहीं लगी? उसके गायब होने के बाद थाने में एफआईआर तक नहीं कराई गई। यही नहीं, दीक्षांत कामरा का एक और कारनामा सामने आया है, जहां उसने जनवरी 2026 में शाम को हाजिरी लगने के बाद पदमपुर स्थित अपने घर जाते हुए को घमूड़वाली पुलिस ने पकड़ा था। उसे शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर रातभर हवालात में रखा गया, अगली सुबह मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और जमानत होने पर वह वापस खुला बंदी शिविर पहुंच गया। इस दौरान उसने अपने आप को खुला बंदी शिविर में रहने और हत्या के दोष में आजीवन कारावास की सजा काटने के तथ्य छुपा लिए थे। नरसिंहपुरा बारानी गोशाला में खुला बंदी शिविर के प्रभारी ने भी इस जानकारी को जेल प्रशासन से छुपा लिया था। यह जानकारी खुद दीक्षांत ने जवाहरनगर पुलिस को अब दी है। दीक्षांत को 3 नवंबर को जवाहरनगर पुलिस ने लग्जरी कार एलेंट्रा के साथ 40 ग्राम अफीम तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया। आरोपी को 4 नवंबर को केंद्रीय कारागृह भिजवाया गया है।
जिले में 3 जगह चल रही हैं खुली जेल
दीक्षांत कामरा पहली बार 3 मई 2025 में नरसिंहपुरा बारानी खुला बंदी शिविर में आया था। 13 फरवरी 2026 को श्रीगंगानगर जेल में दाखिल किया गया। उसके बाद फिर 25 मार्च 2026 को बीछवाल बीकानेर की खुली जेल में भेजा गया। जहां दीक्षांत कामरा 2 अक्टूबर 2026 तक रहा। 3 अक्टूबर 2026 से कृषि अनुसंधान केंद्र श्रीगंगानगर खुली जेल में था। श्रीगंगानगर जिले में कृष्ण गौशाला, कृषि अनुसंधान केंद्र नरसिंहपुरा बारानी, और कृषि अनुसंधान केंद्र जेतसर में खुली जेल चल रही है, जिसमें करीब 55 सजायाफ्ता बंदी रह रहे हैं।
